
राजधानी में स्कूली वाहनों की सुरक्षा जांच का अभियान तय समय पर शुरू नहीं हो सका है। अधिकारियों की टीमें फिलहाल उत्तर प्रदेश एकीकृत स्कूल वाहन प्रबंधन पोर्टल (यूपीआईएसवीएमपी) पर वाहनों का डेटा अपडेट करने में जुटी हैं, जिससे जांच प्रक्रिया कम से कम एक हफ्ते और टल गई है।
15 दिन की निर्धारित समयसीमा बुधवार को पूरी हो गई, लेकिन पोर्टल पर स्कूली वाहनों का ऑनबोर्डिंग कार्य अब भी अधूरा है। आंकड़ों के अनुसार, कुल 1797 स्कूली वाहनों में से 1482 का विवरण पोर्टल पर दर्ज किया जा चुका है, जबकि 1078 वाहनों का निरीक्षण पूरा हुआ है। शेष वाहनों का डेटा अपलोड होने में अभी और समय लगेगा।
परिवहन विभाग के अनुसार, राजधानी में 4491 स्कूल हैं, जिनमें से 4277 को पोर्टल से जोड़ा जा चुका है। इनमें 316 ऐसे स्कूल हैं, जिनके पास अपने वाहन हैं और उन्हें भी ऑनबोर्ड कर लिया गया है, जबकि अनुबंधित वाहनों का पूरा डेटा अभी उपलब्ध नहीं हो सका है।
जांच अभियान पर असर
स्कूली वाहनों की जांच 15 अप्रैल से शुरू होनी थी, लेकिन प्रवर्तन टीमें पोर्टल अपडेट में लगी होने के कारण यह अभियान शुरू नहीं हो पाया। अधिकारियों का कहना है कि ऑनबोर्डिंग कार्य पूरा होते ही जांच अभियान शुरू किया जाएगा।
बिना फिटनेस और परमिट वाले वाहन चिंता का कारण
शहर में कई स्कूली वाहन बिना फिटनेस और परमिट के संचालित हो रहे हैं, जो बच्चों की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकते हैं। मार्च के आंकड़ों के मुताबिक 126 वाहनों की फिटनेस और 49 वाहनों के परमिट समाप्त हो चुके हैं।
तकनीकी और दस्तावेजी अड़चनें
अधिकारियों को विशेष रूप से उन वाहनों का डेटा अपलोड करने में दिक्कत आ रही है, जिनके परमिट खत्म हो चुके हैं। ऐसे मामलों में पहले फिटनेस और परमिट का नवीनीकरण जरूरी है, तभी उन्हें पोर्टल पर अपडेट किया जा सकता है। परिवहन विभाग ने वाहन मालिकों को आवश्यक दस्तावेज जल्द पूरा करने के निर्देश दिए हैं, ताकि सभी वाहनों को पोर्टल पर शामिल कर निरीक्षण प्रक्रिया समय पर पूरी की जा सके।
पोर्टल पर कार्य पूरा होने के बाद ही वाहनों की चेकिंग अभियान शुरू किया जाएगा। साथ ही अब अगर वाहनों में किसी प्रकार की कमी पायी जायेगी तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जायेगी।-प्रभात पाण्डेय, प्रवर्तन लखनऊ




