
रांची। झारखंड में भर्ती परीक्षाओं को लेकर लंबे समय से चल रहे छात्र आंदोलन के बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बड़ा ऐलान किया है। सरकार ने JSSC-CGL परीक्षा रद्द करने के साथ TDPL एजेंसी के जरिए कराई गई परीक्षाओं को भी निरस्त करने की बात कही है। इसके अलावा वर्ष 2014 से अब तक हुई भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की व्यापक जांच के निर्देश दिए गए हैं।
मुख्यमंत्री के ऐलान के बाद भूख हड़ताल पर बैठे देवेंद्र नाथ महतो, उम्मे हबीबा और राहुल क्रांति ने अपना अनशन खत्म कर दिया। हालांकि, छात्रों का एक गुट अब भी CBI जांच की मांग पर आंदोलन जारी रखने के पक्ष में है।
सरकार के फैसले के बाद विवाद का एक हिस्सा जरूर शांत हुआ है, लेकिन कई महत्वपूर्ण सवालों के जवाब अभी सामने नहीं आए हैं। यही वजह है कि JSSC-CGL और भर्ती परीक्षाओं का यह विवाद केवल परीक्षा रद्द करने तक सीमित होता नहीं दिख रहा।
1. JSSC-CGL पास करने वाले अभ्यर्थियों का क्या होगा?
JSSC-CGL रद्द होने का सबसे बड़ा असर उन अभ्यर्थियों पर पड़ेगा, जिन्होंने परीक्षा पास कर चयन प्रक्रिया पूरी कर ली है। कुछ अभ्यर्थी नियुक्ति भी हासिल कर चुके हैं। परीक्षा रद्द होने के बाद ऐसे चयनित उम्मीदवारों ने सरकार के फैसले पर सवाल उठाए हैं।
अब सरकार को स्पष्ट करना होगा कि पहले से चयनित या नियुक्त अभ्यर्थियों की स्थिति क्या होगी। क्या उन्हें दोबारा परीक्षा देनी होगी या उनकी नियुक्ति के लिए कोई अलग कानूनी व्यवस्था की जाएगी?
यह मुद्दा अदालत तक भी पहुंच सकता है। परीक्षा या नियुक्ति रद्द होने से प्रभावित अभ्यर्थियों को कानूनी रास्ता अपनाने का अधिकार है और सरकार के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दिए जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
2. CBI जांच की मांग पर अभी फैसला नहीं
छात्र आंदोलन की प्रमुख मांगों में भर्ती परीक्षाओं की CBI जांच भी शामिल रही है। हालांकि, सरकार ने फिलहाल इस मांग को स्वीकार नहीं किया है। सरकार की ओर से CID/SIT जांच और वर्ष 2014 से अब तक हुई भर्ती परीक्षाओं की व्यापक जांच की बात कही गई है।
आंदोलनकारी छात्रों का तर्क है कि यदि अलग-अलग वर्षों में काम करने वाली एजेंसियों और निजी कंपनियों की भूमिका सामने आ रही है तो जांच किसी स्वतंत्र केंद्रीय एजेंसी से क्यों न कराई जाए। छात्रों का एक गुट CBI जांच की मांग पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने की बात कह रहा है।
3. TDPL से जुड़ी कौन-कौन सी परीक्षाएं होंगी रद्द?
सरकार ने TDPL एजेंसी के जरिए कराई गई परीक्षाओं को रद्द करने का ऐलान किया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक परीक्षा, परिणाम और चयन प्रक्रिया को निरस्त करने की बात सामने आई है।
लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि TDPL से जुड़ी किन-किन परीक्षाओं को रद्द किया जाएगा? किन परिणामों पर इसका असर पड़ेगा? जिन अभ्यर्थियों की नियुक्ति हो चुकी है, उनका क्या होगा? दोबारा परीक्षा कब आयोजित होगी?
आंदोलन कर रहे छात्रों के मुताबिक इन सवालों पर स्पष्ट लिखित आदेश और परीक्षाओं की पूरी सूची सामने आना अभी बाकी है। ऐसे में केवल घोषणा से विवाद पूरी तरह खत्म होना मुश्किल दिखाई दे रहा है।
4. 11वीं-13वीं JPSC का क्या होगा?
भर्ती विवाद का एक संवेदनशील हिस्सा 11वीं-13वीं JPSC से भी जुड़ा है। छात्रों का दावा है कि इस परीक्षा की मेरिट लिस्ट तैयार करने की प्रक्रिया में भी TDPL की भूमिका रही थी।
ऐसे में TDPL से जुड़ी परीक्षाओं को रद्द करने की घोषणा के बाद 11वीं-13वीं JPSC को लेकर सरकार का अंतिम रुख क्या होगा, यह स्पष्ट होना बाकी है। इस मामले में अलग से स्पष्ट आदेश की जरूरत महसूस की जा रही है।
वहीं, सरकार 14वीं JPSC को रद्द करने का ऐलान पहले ही कर चुकी है।
5. उम्र सीमा में छूट यानी Age Relaxation का क्या होगा?
भर्ती परीक्षाओं में देरी और परीक्षाओं के रद्द होने का असर लंबे समय से तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों की उम्र पर भी पड़ा है। इसी वजह से आंदोलनकारी छात्रों की मांगों में एज रिलैक्सेशन भी शामिल रहा है।
सिर्फ दोबारा परीक्षा कराने का फैसला उन उम्मीदवारों की समस्या पूरी तरह हल नहीं करेगा, जो इस दौरान निर्धारित उम्र सीमा पार कर चुके हैं या उसके करीब पहुंच गए हैं। ऐसे अभ्यर्थियों को दोबारा परीक्षा में शामिल होने का अवसर देने के लिए सरकार को उम्र सीमा में छूट पर भी स्पष्ट निर्णय लेना होगा।
6. 2014 से जांच का दायरा कितना बड़ा होगा?
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने वर्ष 2014 से अब तक हुई भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ियों की व्यापक जांच के आदेश दिए हैं। 17 अगस्त के अपने बयान में उन्होंने कहा कि CID और SIT की जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं।
मुख्यमंत्री के अनुसार, अलग-अलग समय में काम करने वाली कंपनियों के बीच एक जटिल नेटवर्क की बात सामने आई है। ऐसे में जांच का दायरा केवल JSSC-CGL या मौजूदा विवाद तक सीमित रहने की संभावना नहीं है।
अब सवाल यह है कि 2014 से हुई कितनी भर्ती परीक्षाएं जांच के दायरे में आएंगी? अगर किसी पुरानी परीक्षा में गड़बड़ी सामने आती है तो उसके परिणाम और उन परीक्षाओं के आधार पर हुई नियुक्तियों का क्या होगा? यह आने वाले समय में सबसे जटिल कानूनी मुद्दों में से एक बन सकता है।
NEET से क्यों अलग है झारखंड का भर्ती विवाद?
झारखंड का मामला NEET विवाद से कई मायनों में अलग है। NEET में एक केंद्रीय परीक्षा और देशभर के अभ्यर्थियों से जुड़ा विवाद था, जबकि झारखंड में मामला JPSC, JSSC, अलग-अलग भर्ती परीक्षाओं, आउटसोर्स एजेंसी TDPL और वर्ष 2014 से चली आ रही परीक्षा व्यवस्था तक फैला हुआ है।
सरकार ने भी जांच का दायरा 2014 तक बढ़ाने की बात कही है। इसलिए यहां केवल दोबारा परीक्षा आयोजित करना ही पर्याप्त समाधान नहीं होगा। सरकार को री-एग्जाम के साथ पहले से चयनित और नियुक्त अभ्यर्थियों की स्थिति, उम्र सीमा में छूट तथा पुरानी परीक्षाओं के परिणामों पर संभावित असर को लेकर भी स्पष्ट नीति बतानी होगी।
हेमंत सोरेन के ऐलान के बाद भी क्यों बाकी है असली सवाल?
JSSC-CGL रद्द करने और TDPL से जुड़ी परीक्षाओं पर कार्रवाई के ऐलान से सरकार ने आंदोलन की प्रमुख मांगों में से कुछ पर कदम जरूर उठाया है। लेकिन CBI जांच, चयनित अभ्यर्थियों का भविष्य, 11वीं-13वीं JPSC, एज रिलैक्सेशन और 2014 से हुई परीक्षाओं की जांच के परिणाम जैसे सवाल अभी भी जवाब मांग रहे हैं।
यही वजह है कि मुख्यमंत्री के ऐलान के बाद कुछ आंदोलनकारियों ने अनशन खत्म कर दिया, लेकिन एक गुट का आंदोलन जारी रखने का फैसला बताता है कि भर्ती परीक्षा विवाद का समाधान अभी पूरी तरह नहीं हुआ है।




