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Yuzvendra Chahal Retirement : क्रिकेटर युजवेंद्र चहल ने का बड़ा फैसला, अचानक किया संन्यास का ऐलान, लिखा भावुक पोस्ट

नई दिल्ली। टीम इंडिया के दिग्गज स्पिनर युजवेंद्र चहल ने फर्स्ट क्लास क्रिकेट से संन्यास लेने का फैसला किया है। चहल के इस फैसले के बाद अब क्रिकेट फैंस उन्हें रेड बॉल क्रिकेट में खेलते हुए नहीं देख पाएंगे। युजवेंद्र चहल ने भारतीय टीम के लिए अब तक कोई टेस्ट मैच नहीं खेला है।

हालांकि सीमित ओवरों के क्रिकेट में उनकी वापसी की उम्मीद अभी बनी हुई है। वनडे और टी20 क्रिकेट में चहल ने अपनी गेंदबाजी से भारतीय टीम के लिए अहम भूमिका निभाई है। फर्स्ट क्लास क्रिकेट से संन्यास के बावजूद चहल के लिए सीमित ओवरों का क्रिकेट पूरी तरह बंद नहीं हुआ है। ऐसे में आने वाले समय में वनडे और टी20 टीम में उनकी वापसी पर नजर रहेगी।

चहल ने सोशल मीडिया पर साझा किया भावुक पोस्ट

चहल ने सोशल मीडिया पर भावुक पोस्ट साझा करते हुए अपने रेड-बॉल क्रिकेट के सफर को याद किया। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने पहली बार लाल गेंद हाथ में पकड़ी थी, तब वह सिर्फ 10 साल के थे और उन्हें अंदाजा नहीं था कि क्रिकेट उनके जीवन का इतना अहम हिस्सा बन जाएगा।

चहल ने कहा कि उनके लिए रेड-बॉल क्रिकेट महज एक फॉर्मेट नहीं रहा, बल्कि इसी खेल ने उन्हें धैर्य, संघर्ष, चरित्र और मुश्किल परिस्थितियों में डटे रहने का मतलब सिखाया। उन्होंने बताया कि फर्स्ट क्लास क्रिकेट में उनका आखिरी मुकाबला लॉर्ड्स में हुआ। टेस्ट कैप पहनना उनका हमेशा से सपना था, लेकिन यह सपना पूरा नहीं हो सका।

चहल ने अपने बयान में कहा कि टेस्ट क्रिकेट खेलने का मौका नहीं मिलने के बावजूद वह अपने सफर से पूरी तरह संतुष्ट हैं और फर्स्ट क्लास क्रिकेट में मिले हर अवसर के लिए आभारी हैं। उन्होंने कहा कि रेड बॉल ने उन्हें जिंदगी की कुछ सबसे खूबसूरत यादें दी हैं, जिन्हें वह हमेशा अपने साथ रखेंगे।

लेकिन मैं अभी खत्म नहीं हुआ हूं… 

चहल ने साफ किया कि फर्स्ट क्लास क्रिकेट से संन्यास लेने के बावजूद वह सीमित ओवरों के क्रिकेट में खेलना जारी रखना चाहते हैं। उन्होंने कहा, “मैं अभी खत्म नहीं हुआ हूं। अपने देश के लिए खेलने की भूख अभी भी उतनी ही है। मुझे भरोसा है कि मेरे अंदर अभी क्रिकेट बाकी है और वनडे तथा टी20 फॉर्मेट में एक और मौका हासिल करने के लिए मैं अपना सब कुछ लगा दूंगा।”

चहल ने हरियाणा क्रिकेट एसोसिएशन के साथ-साथ रणबीर सिंह महिंद्रा और अनिरुद्ध सिंह चौधरी का भी विशेष तौर पर आभार जताया। उन्होंने कहा कि पूरे सफर के दौरान मिले समर्थन, भरोसे और विश्वास के लिए वह उनके शुक्रगुजार हैं।

10 साल की उम्र में पहली बार लाल गेंद हाथ में पकड़ने से लेकर लॉर्ड्स में अपना आखिरी फर्स्ट क्लास मुकाबला खेलने तक चहल का यह सफर लंबा और यादगार रहा। अब उनका फोकस सफेद गेंद वाले क्रिकेट में देश के लिए एक और मौका हासिल करने पर है।

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