
दिल्ली। निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया पूरी कर चुके राज्यों में ऑनलाइन मतदाता नामांकन फॉर्म-6 से एसआईआर से जुड़ी अतिरिक्त घोषणा को हटा दिया है। यह फैसला आयोग की उस बैठक के कुछ दिनों बाद लिया गया जिसमें तय किया गया था कि यह शर्त केवल एसआईआर प्रक्रिया के दौरान ही लागू रहेगी।
क्या था SIR से जुड़ा अतिरिक्त कॉलम?
इस घोषणा के तहत नए आवेदकों को यह विवरण देना अनिवार्य होता है कि वे या उनके माता-पिता या दादा-दादी पहले के किसी गहन पुनरीक्षण के दौरान तैयार मतदाता सूचियों से जुड़े थे। यह घोषणा उन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ECINET पोर्टल पर अब भी उपलब्ध है जहां एसआईआर प्रक्रिया जारी है। जिन राज्यों में एसआईआर की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है वहां ECINET ऐप और पोर्टल के साथ-साथ संबंधित मुख्य निर्वाचन अधिकारी के पोर्टल से भी अतिरिक्त घोषणा वाला हिस्सा हटा दिया गया है।
अब नए मतदाताओं को क्या करना होगा?
अब नामांकन चाहने वाले आवेदकों को केवल ‘मतदाता पंजीकरण नियम, 1960’ के तहत निर्धारित वैधानिक ‘फॉर्म 6’ ही भरना होगा। फॉर्म-6 में SIR से जुड़ी अतिरिक्त घोषणा जोड़े जाने को लेकर निर्वाचन आयोग के भीतर भी मतभेद की खबरें सामने आई थीं। वहीं, निर्वाचन आयोग ने अपने सार्वजनिक स्पष्टीकरण में कहा था कि फॉर्म-6 में कोई बदलाव नहीं किया गया था, बल्कि SIR के दौरान एक अतिरिक्त आवश्यकता जोड़ी गई थी।
आयोग ने यह भी कहा था कि SIR से जुड़े उसके फैसलों को पूर्ण आयोग की सर्वसम्मत मंजूरी प्राप्त थी। यह कदम मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू एवं विवेक जोशी की सदस्यता वाले पूर्ण आयोग की 26 सितंबर की बैठक के बाद उठाया गया है।
SIR को लेकर आयोग ने लिए कई फैसले
बैठक के बाद निर्वाचन आयोग ने कहा था कि फॉर्म-6 के साथ जोड़ी गई घोषणा एसआईआर के लिए थी और ”गैर-एसआईआर अवधि में नियमों (निर्वाचन पंजीकरण नियम, 1960) के अनुसार लागू फॉर्म का इस्तेमाल किया जाएगा।”
फॉर्म-6 में बदलाव से जुड़ा मुद्दा उस समय विवाद का विषय बन गया था जब यह सामने आया कि संधू और जोशी ने इसमें किए गए बदलावों पर आपत्ति जताई थी।
फॉर्म-6 पात्र नागरिकों द्वारा मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला वैधानिक फॉर्म है और जोशी ने इसमें बदलाव पर यह कहते हुए आपत्ति जताई थी कि निर्वाचन पंजीकरण नियम, 1960 के तहत निर्धारित फॉर्म में नियमों में संशोधन किए बिना बदलाव नहीं किया जा सकता। संधू ने भी इस पर सहमति जताई थी। ईसीआईनेट पर ऑनलाइन फॉर्म-6 प्रक्रिया में एसआईआर से जुड़ी घोषणा जोड़े जाने के बाद संधू ने फिर आपत्ति जताई थी और इसे ”अनधिकृत/अवैध” बताते हुए इसे हटाने की मांग की थी।
फैसलों पर आपत्तियों की रिपोर्ट के बीच आयोग का स्पष्टीकरण
निर्वाचन आयोग ने अपने सार्वजनिक बयानों में कहा है कि फॉर्म-6 में कोई संशोधन नहीं किया गया था और यह घोषणा एसआईआर से संबंधित अतिरिक्त आवश्यकता थी। आयोग ने यह भी कहा कि बिहार में एसआईआर से जुड़े अपने फैसले में उच्चतम न्यायालय ने इस घोषणा को बरकरार रखा था। इस संबंध में 26 सितंबर को आयोग का फैसला आया।
आयोग ने SIR फैसलों को बताया सर्वसम्मत
आयोग का यह फैसला ऐसे समय में आया है जब अंग्रेजी दैनिक ‘इंडियन एक्सप्रेस’ में यह खबर आई कि निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीने की अवधि में कम से कम 14 मौकों पर फैसलों और आदेशों पर आपत्तियां दर्ज कराई थीं। उनका कहना था कि इनमें से कुछ फैसले उनकी जानकारी के बिना लिए गए थे। हालांकि, आयोग ने 26 सितंबर के अपने बयान में कहा था कि एसआईआर से जुड़े आदेशों को तीनों निर्वाचन आयुक्तों की सर्वसम्मत मंजूरी प्राप्त थी।




