
नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और हालिया संघर्ष के बीच ईरान ने अमेरिका और इजरायल पर अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करने का आरोप लगाते हुए BRICS देशों से खुलकर इसकी निंदा करने की अपील की है। गुरुवार को नई दिल्ली में आयोजित BRICS विदेश मंत्रियों की बैठक में ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरगची ने कहा कि दुनिया एक नए वैश्विक व्यवस्था की ओर बढ़ रही है, जिसमें ग्लोबल साउथ यानी विकासशील देशों की भूमिका लगातार मजबूत हो रही है।
‘ईरान की लड़ाई सिर्फ उसका अपना संघर्ष नहीं’
अरगची ने कहा कि ईरान BRICS को उभरती हुई नई विश्व व्यवस्था का प्रतीक मानता है। उन्होंने कहा कि जो सपना पहले सिर्फ एक महत्वाकांक्षी विचार था, वह अब हकीकत बनता दिख रहा है, लेकिन यह व्यवस्था अभी भी नाजुक स्थिति में है। उन्होंने आरोप लगाया कि कमजोर पड़ती साम्राज्यवादी ताकतें समय को पीछे ले जाने की कोशिश कर रही हैं और इसी कारण आक्रामक रवैया अपना रही हैं। ईरानी विदेश मंत्री ने कहा कि पश्चिमी देशों के खिलाफ ईरान की लड़ाई सिर्फ उसका अपना संघर्ष नहीं है, बल्कि यह BRICS देशों और पूरे ग्लोबल साउथ के हितों की रक्षा से जुड़ा मामला है।
‘दुनिया में ऐसी सोच की कोई जगह नहीं होनी चाहिए’
अरगची ने कहा कि ईरान के सैनिकों ने ‘पश्चिमी वर्चस्व’ और अमेरिका की ‘मनमानी’ का मुकाबला करते हुए अपनी जान दी है। उन्होंने BRICS देशों के समर्थन और एकजुटता के लिए आभार जताते हुए कहा कि अब सभी सदस्य देशों को अमेरिका की ‘श्रेष्ठता और दंडमुक्ति की मानसिकता’ को खत्म करने के लिए और अधिक प्रयास करने चाहिए। उन्होंने कहा कि आज की दुनिया में ऐसी सोच की कोई जगह नहीं होनी चाहिए। अरगची ने पश्चिमी देशों पर एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका में हिंसा, संप्रभुता के उल्लंघन और मानवाधिकार संकटों को समर्थन देने का आरोप लगाया।
US-इजरायल की बिना किसी शर्त के निंदा करने की मांग
अरगची ने कहा कि जो घटनाएं कभी शर्मनाक मानी जाती थीं, अब उन्हें पश्चिमी देशों की राजधानियों में नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने ‘भयानक नरसंहार’, देशों की संप्रभुता के उल्लंघन और समुद्री क्षेत्रों में खुली लूटपाट जैसे मामलों का भी जिक्र किया। ईरानी विदेश मंत्री ने BRICS सदस्य देशों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के खिलाफ की गई ‘गैरकानूनी आक्रामक कार्रवाई’ की स्पष्ट और बिना किसी शर्त के निंदा करने की मांग की। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र चार्टर का उल्लंघन करने वालों को जवाबदेह बनाने और युद्ध जैसी स्थिति को रोकने के लिए व्यावहारिक कदम उठाने जरूरी हैं।
जयशंकर ने पश्चिम एशिया की स्थिति पर चिंता जताई
वहीं, बैठक में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी पश्चिम एशिया की स्थिति पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि खाड़ी क्षेत्र में तनाव, समुद्री यातायात पर खतरा और ऊर्जा ढांचे पर असर यह दिखाता है कि हालात कितने नाजुक हैं। जयशंकर ने कहा कि भारत फिलिस्तीन मुद्दे पर ‘दो-राष्ट्र समाधान’ का समर्थन करता है। उन्होंने लेबनान, सीरिया, सूडान, यमन और लीबिया की स्थिति का भी जिक्र करते हुए कहा कि इन संकटों का असर मानवीय स्थिति पर पड़ रहा है और इसके लिए लगातार अंतरराष्ट्रीय सहयोग और कूटनीतिक प्रयास जरूरी हैं।
15 मई तक BRICS विदेश मंत्रियों की बैठक
जयशंकर ने कहा कि शांति को टुकड़ों में नहीं बांटा जा सकता और अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान करना, नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और सार्वजनिक ढांचे को निशाना बनाने से बचना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि भारत क्षेत्र में तनाव कम करने और स्थिरता बहाल करने के हर प्रयास में रचनात्मक भूमिका निभाने को तैयार है। नई दिल्ली में 14 और 15 मई को हो रही BRICS विदेश मंत्रियों की बैठक में वैश्विक आर्थिक व्यवस्था और भू-राजनीतिक चुनौतियों पर चर्चा हो रही है। भारत ने इस साल 1 जनवरी से BRICS की अध्यक्षता संभाली है। इससे पहले भारत 2012, 2016 और 2021 में भी BRICS शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर चुका है।




