उत्तर प्रदेश

लखनऊ हाईकोर्ट ने ऑप्टोमेट्रिस्ट भर्ती मामले में लगाई अंतरिम रोक, राज्य सरकार को नियुक्ति पत्र जारी करने पर दिया आदेश

हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने नियमित नेत्र रोग विशेषज्ञों (ऑप्टोमेट्रिस्ट) की भर्ती मामले में राज्य सरकार को आदेश दिया है कि अगली सुनवाई तक चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र न जारी किये जाएं। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 21 अप्रैल की तिथि नियत करते हुए, राज्य सरकार से जवाब तलब किया है।

यह आदेश न्यायमूर्ति राजीव सिंह की एकल पीठ ने सुदीप शुक्ला व 45 अन्य की ओर से दाखिल एक याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया है। याचियों का कहना है कि उन्हें सालों पहले राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन योजना के तहत संविदा पर नेत्र विशेषज्ञ के रूप में नियुक्त किया गया था।

वे लंबे समय से संविदा पर संतोषजनक रूप से अपनी सेवाएं दे रहे हैं और इस कारण नियमित भर्ती में उनके अनुभव को वरीयता दी जानी चाहिए। लेकिन उनकी मांग को दरकिनार कर नए सिरे से नियमित चयन किये जाने की प्रकिया चल रही है।

सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की ओर से बताया गया कि नियमित नेत्र विशेषज्ञों की भर्ती प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और चयन सूची राज्य सरकार को भेज दी गई है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि नियमों में संविदा कर्मियों को वरीयता देने का कोई प्रावधान नहीं है। हालांकि सरकार की ओर से अपना जवाब दाखिल करने के लिए समय की भी मांग की गई। जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया तथा अंतरिम आदेश देते हुए कहा कि अगली सुनवाई तक चयन प्रक्रिया के तहत किसी भी अभ्यर्थी को नियुक्ति पत्र जारी न किया जाए।

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