उत्तर प्रदेश

IGRS पर शिकायतों में लगाई निस्तारण की झूठी रिपोर्ट, मुख्य सचिव की समीक्षा में खुली पोल, 23 अधिकारी पर कार्रवाई के निर्देश

नगर निगम के अधिकारियों और इंजीनियरों ने आईजीआरएस पर की गई शिकायतों का फर्जी निस्तारण कर आख्या लगा दी। जांच में 23 अधिकारी दोषी पाए गए हैं। इन अधिकारियाें ने सड़क मरम्मत से हाउस टैक्स असेसमेंट तक की शिकायतों में निस्तारण की झूठी रिपोर्ट लगा दी।

मुख्य सचिव कार्यालय में समीक्षा में पोल खुल गई। अब नगर आयुक्त गौरव कुमार ने संबंधित अधिकारियों से दो दिन में स्पष्टीकरण मांगा है। इन अधिकारियों ने जोन के जोनल अधिकारी, चीफ इंजीनियरिंग, जीएम जलकल, अधिशासी अभियंत से लेकर संपत्ति विभाग के अधिकारी शामिल हैं। अब इन अधिकारियों पर शासन से कार्रवाई तय है।

मुख्य सचिव एसपी गोयल ने 17 फरवरी को वीडियो कॉफ्रेंसिंग से आईजीआरएस की शिकायतों के निस्तारण की समीक्षा की थी। उन्होंने जिलाधिकारी विशाख जी को आईजीआरएस में झूठी रिपोर्ट लगाने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई के निर्देश दिए थे।

इसके बाद जिलाधिकारी ने नगर आयुक्त को पत्र लिखकर कार्रवाई के निर्देश दिए। आम जनमानस से जुड़ी शिकायतों की झूठी रिपोर्ट लगाने में सबसे आगे जोन स्तर पर जोनल अफसर शामिल हैं। साथ ही आरआर चीफ इंजीनियर और संपत्ति प्रभारी भी दोषी पाए हैं। नगर आयुक्त सभी अफसरों से स्पष्टीकरण लेकर शासन को रिपोर्ट के साथ भेजेंगे। इसके बाद शासन स्तर से कार्रवाई की जाएगी। माना जा रहा है कि कुछ अफसर निलंबित किए जा सकते हैं।

फर्जी निस्तारण में ये अधिकारी व इंजीनियर शामिल

जोनल अधिकारी ओपी सिंह, संजय यादव, आकाश कुमार, शिल्पा कुमारी, विनित सिंह, अमरजीत यादव, विकास सिंह, जोनल अधिकारी/संपत्ति प्रभारी रामेश्वर प्रसाद, चीफ इंजिनियर मनोज प्रभात, जीएम जलकल कुलदीप सिंह, अधिशासी अभियंता अतुल मिश्रा, संजय पांडेय, नजमी, शील श्रीवास्तव, अशोक यादव, एई आलोक श्रीवास्तव

300 से ज्यादा शिकायतों का फर्जी निस्तारण

सड़क, सीवर लीकेज, हाउस टैक्स असेसमेंट, संपत्ति, होर्डिंग सहित म्यूटेशन से जुड़ी कई शिकायतों को लेकर आम लोग आईजीआरएस करते हैं। इन शिकायतों के निपटारे का जिम्मा नगर निगम के अफसरों पर होता है। लेकिन समस्या दूर करने के बजाए फर्जी रिपोर्ट लगाते हैं। इस तरह की 300 से ज्यादा मामले पकड़े गए हैं।

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