
लखनऊ। राष्ट्रीय हरित अधिकरण NGT ने लखनऊ में गोमती नदी के पर्यावरण को लेकर एक बेहद सख्त कदम उठाया है। एनजीटी ने गोमती नदी के किनारे और उसके बाढ़ क्षेत्र (Floodplain) में चल रहे सभी प्रकार के निर्माण कार्यों पर तत्काल प्रभाव से अंतरिम रोक लगा दी है। इसके साथ ही ट्रिब्यूनल ने लखनऊ विकास प्राधिकरण (लविप्रा) समेत सभी संबंधित विभागों को नोटिस जारी कर चार सप्ताह के भीतर जवाब तलब किया है। एनजीटी के इस कड़े आदेश से राजधानी में चल रही करीब 2,500 करोड़ रुपये की विभिन्न बड़ी विकास परियोजनाओं पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।
पर्यावरण नियमों के उल्लंघन का आरोप
एनजीटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. अफरोज अहमद की पीठ ने पर्यावरण कार्यकर्ता व अधिवक्ता आलोक सिंह की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह अंतरिम आदेश पारित किया। मामले की अगली सुनवाई 25 अगस्त को तय की गई है।
याचिका में उठाए गए मुख्य बिंदु
गोमती नदी के दोनों किनारों पर तटबंधों का चौड़ीकरण, फोर-लेन सड़क निर्माण और बहुमंजिला इमारतों का निर्माण पर्यावरणीय नियमों को ताक पर रखकर किया जा रहा है। नियमों के मुताबिक नदी से 400 मीटर के दायरे में निर्माण पर पूरी तरह प्रतिबंध है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि कई स्थानों पर नदी किनारे से मात्र 6 से 20 मीटर की दूरी पर धड़ल्ले से निर्माण कार्य चल रहे हैं। इसमें मुख्य रूप से पिपराघाट पुल से शहीद पथ तथा शहीद पथ से किसान पथ तक चल रही परियोजनाओं में नियमों के उल्लंघन का हवाला दिया गया है।
इन बड़ी परियोजनाओं पर पड़ेगा सीधा असर
इस अंतरिम रोक के कारण लखनऊ की कई ड्रीम प्रोजेक्ट्स और रियल एस्टेट संपत्तियों पर सीधा असर पड़ने की आशंका है, ग्रीन कॉरिडोर के तीसरे और चौथे चरण के तहत प्रस्तावित तटबंध और फोर-लेन सड़क का काम प्रभावित होगा। इस प्राइम इलाके में नदी की ओर विकसित की जा रही कई निजी और सरकारी बहुमंजिला आवासीय/व्यावसायिक इमारतों का काम रुक सकता है।
गोमती पर भी लागू होंगे गंगा अथॉरिटी के नियम
एनजीटी ने अपने आदेश में एक महत्वपूर्ण कानूनी पहलू को स्पष्ट करते हुए कहा कि ‘गंगा नदी (संरक्षण, सुरक्षा एवं प्रबंधन) प्राधिकरण आदेश, 2016’ के प्रावधान केवल गंगा की मुख्य धारा तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि उसकी सभी सहायक नदियों पर भी समान रूप से लागू होते हैं। गोमती नदी गंगा नदी तंत्र का एक अहम हिस्सा है, इसलिए उसके सक्रिय बाढ़ क्षेत्र, नदी तल और तटीय क्षेत्रों में किसी भी प्रकार के स्थायी या अस्थायी निर्माण पर ये कड़े नियम लागू होंगे।




