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भारत आएंगे लिकटेंस्टीन के राजकुमार एलोइस, पीएम मोदी से करेगें मुलाकात, जानें क्यों खास है उनका दौरा

दिल्ली। लिकटेंस्टाइन के कार्यवाहक राष्ट्राध्यक्ष और राजकुमार एलोइस रविवार को भारत की चार दिन की राजकीय यात्रा पर आएंगे। विदेश मंत्रालय ने शनिवार को बताया कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर यहां आ रहे हैं।इस दौरान उनकी प्रधानमंत्री के साथ व्यापार, निवेश, विज्ञान, तकनीक, नवाचार और दोनों देशों के लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने जैसे मुद्दों पर द्विपक्षीय बैठक होगी। बैठक में क्षेत्रीय और वैश्विक घटनाक्रम पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया जाएगा।

एलोइस और उनकी पत्नी भी आयेगी भारत 

राजकुमार एलोइस के साथ उनकी पत्नी राजकुमारी सोफी के अलावा वरिष्ठ अधिकारियों और प्रमुख उद्योगपतियों का एक प्रतिनिधिमंडल भी भारत आएगा। यह 2026 में राजकुमार एलोइस का भारत का दूसरा दौरा होगा। इससे पहले वह फरवरी में एआई शिखर सम्मेलन में शामिल होने भारत आए थे। इससे पहले उन्होंने 2010 और 2018 में भी भारत का दौरा किया था।

पीएम मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक 

इस दौरान राजकुमार एलोइस और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बीच द्विपक्षीय बैठक होगी जिसमें व्यापार एवं निवेश, विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार तथा दोनों देशों के लोगों के बीच आपसी संपर्क सहित विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग पर चर्चा होगी। इसके अलावा, दोनों नेता क्षेत्रीय और वैश्विक घटनाक्रमों पर विचारों का आदान-प्रदान करेंगे। यात्रा के दौरान राजकुमार एलोइस राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से भी मुलाकात करेंगे। राष्ट्रपति उनके सम्मान में आधिकारिक भोज का आयोजन करेंगी। विदेश मंत्री एस. जयशंकर भी युवराज एलोइस से मुलाकात करेंगे।

विदेश मंत्रालय ने बताया पूरा कार्यक्रम 

विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस दौरे से भारत और लिकटेंस्टीन के बीच बढ़ते संबंधों को और गति मिलने की उम्मीद है। खास तौर पर 2025 में भारत और यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ के बीच व्यापार एवं आर्थिक साझेदारी समझौता लागू होने के बाद दोनों पक्षों के बीच सहयोग बढ़ाने पर जोर रहेगा। इस दौरे का उद्देश्य भारत और लिकटेंस्टीन के बीच मैत्रीपूर्ण संबंधों को और मजबूत करना तथा आपसी हित के नए क्षेत्रों में साझेदारी की संभावनाओं को आगे बढ़ाना है। मंत्रालय ने एक बयान में कहा, ”यह यात्रा भारत और लिकटेंस्टाइन के बीच मैत्रीपूर्ण संबंधों को और प्रगाढ़ करने तथा आपसी हित के नए क्षेत्रों में साझेदारी विकसित करने का अवसर प्रदान करेगी।”

एफटीए पर रहेगा खास जोर

साल 2026 में युवराज एलोइस की यह दूसरी भारत यात्रा होगी। उन्होंने इससे पहले वर्ष 2010 और 2018 में भी भारत की यात्रा की थी। करीब 16 वर्षो तक चली बातचीत के बाद भारत और यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (ईएफटीए) के बीच मार्च 2024 में टीईपीए पर हस्ताक्षर किए गए थे। यह समझौता पिछले वर्ष अक्टूबर में लागू हुआ था। इस व्यापक व्यापार समझौते के तहत ईएफटीए के सदस्य देश आइसलैंड, लिकटेंस्टाइन, नॉर्वे और स्विट्जरलैंड ने अगले 15 वर्षों में भारत में 100 अरब अमेरिकी डॉलर का निवेश करने का लक्ष्य रखा है।

यूरोप के छोटे देश से भारत की बड़ी आर्थिक साझेदारी

यूरोप के छोटे से देश लिकटेंस्टीन के साथ भारत के संबंध अब व्यापार, निवेश और आधुनिक तकनीक के क्षेत्र में नई संभावनाओं की ओर बढ़ रहे हैं। दोनों देशों के बीच वर्ष 1993 में राजनयिक संबंध स्थापित हुए थे। अब भारत और यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (EFTA) के बीच व्यापार एवं आर्थिक साझेदारी समझौता (TEPA) लागू होने के बाद इन रिश्तों को नई गति मिलने की उम्मीद है। लिकटेंस्टीन के हेरिडिटरी प्रिंस एलोइस की 25 से 28 अक्टूबर 2026 तक प्रस्तावित भारत की राजकीय यात्रा भी इसी बढ़ते सहयोग के लिहाज से अहम है। इस दौरान व्यापार, निवेश, विज्ञान, तकनीक, नवाचार और दोनों देशों के लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने जैसे मुद्दों पर चर्चा होनी है।

लिकटेंस्टीन और भारत के लिए क्यों है अहम?

लिकटेंस्टीन मध्य यूरोप में स्थित एक छोटा, स्थलरुद्ध देश है। इसकी सीमाएं स्विट्जरलैंड और ऑस्ट्रिया से लगती हैं। आकार में छोटा होने के बावजूद यह उन्नत विनिर्माण, सटीक उपकरणों, औद्योगिक तकनीक और वित्तीय सेवाओं के लिए जाना जाता है। भारत जैसे बड़े बाजार के साथ इसकी साझेदारी कंपनियों को निवेश, उत्पादन और तकनीकी सहयोग के नए अवसर दे सकती है। भारत के लिए लिकटेंस्टीन के साथ संबंध केवल द्विपक्षीय व्यापार तक सीमित नहीं हैं। यह यूरोप के व्यापक आर्थिक नेटवर्क तक पहुंच और उच्च तकनीक वाले उद्योगों के साथ सहयोग का भी अवसर है।

1993 में स्थापित हुए थे राजनयिक संबंध

भारत और लिकटेंस्टीन ने 1993 में औपचारिक राजनयिक संबंध स्थापित किए थे। वर्ष 2023 में दोनों देशों ने इन संबंधों की 30वीं वर्षगांठ मनाई। भारत का स्विट्जरलैंड में स्थित राजदूत लिकटेंस्टीन के लिए भी मान्यता प्राप्त राजदूत होता है। समय के साथ दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय संपर्क भी बढ़े हैं। प्रिंस एलोइस 2010 और 2018 में भारत आ चुके हैं। फरवरी 2026 में उन्होंने नई दिल्ली में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी। दोनों नेताओं ने व्यापार, निवेश, उभरती तकनीक और नवाचार में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की थी।

EFTA समझौते से व्यापार और निवेश को मिल सकती है गति

भारत और लिकटेंस्टीन के आर्थिक संबंधों में सबसे अहम पहलुओं में से एक भारत-EFTA व्यापार एवं आर्थिक साझेदारी समझौता है। EFTA में चार देश शामिल हैं—स्विट्जरलैंड, नॉर्वे, आइसलैंड और लिकटेंस्टीन। यह समझौता 1 अक्टूबर 2025 से लागू हुआ था। समझौते का उद्देश्य व्यापार को आसान बनाना, बाजार तक पहुंच में सुधार करना और निवेश को प्रोत्साहित करना है। भारत और EFTA देशों ने अगले 15 वर्षों में भारत में 100 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश को सुगम बनाने की महत्वाकांक्षा जताई है। यह लक्ष्य व्यापक EFTA साझेदारी से जुड़ा है, केवल लिकटेंस्टीन से होने वाले निवेश का आंकड़ा नहीं है।

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