
दिल्ली। पर्यावरण मंत्रालय की विशेषज्ञ समिति ने वाराणसी और कोलकाता को जोड़ने के लिए 235 किलोमीटर लंबे ‘ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे’ बनाने की पर्यावरण मंजूरी देने की सिफारिश की है। इस योजना के पश्चिम बंगाल में 103 हेक्टेयर से अधिक आरक्षित और संरक्षित वन क्षेत्र के भू उपयोग में बदलाव करने की जरूरत होगी। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की प्रस्तावित परियोजना का एक हिस्सा बाघों के प्राकृतिक आवास से भी होकर गुजरेगा।
इसमें चार से छह लेन के एक्सप्रेसवे का निर्माण शामिल है और जिसकी लागत 9,250 करोड़ रुपये है। इस परियोजना के विवरण पर विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति (ईएसी) की 444वीं बैठक में चर्चा की गई, जो 23 अप्रैल और 24 अप्रैल के बीच हुई थी। बैठक विवरण के मुताबिक यह परियोजना पुरुलिया, बांकुड़ा, पश्चिम मेदिनीपुर, हुगली और हावड़ा जिलों से होकर गुजरेगी और इसके लिए गैर-वन क्षेत्रों में 40,000 पेड़ों और वन क्षेत्रों में 10,000 पेड़ों की कटाई की आवश्यकता होगी।
प्रस्तावित परियोजना से 7.75 किलोमीटर की दूरी पर जंगल महल हाथी गलियारा भी स्थित है। मौजूदा समय में हाथी गलियारे के कई हिस्सों से राष्ट्रीय राजमार्ग गुजरता है। प्रस्तावित परियोजना क्षेत्र में वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम के अंतर्गत अनुसूची-I में सूचीबद्ध 17 प्रजातियां पाई जाती हैं, जैसे कि सियार, सांभर हिरण, धारीदार लकड़बग्घा, भारतीय लोमड़ी, भारतीय हाथी और तेंदुआ। वन्यजीवों की आवाजाही को नियंत्रित करने के लिए, एनएचएआई ने 20 हाथी-सह-वन्यजीव अंडरपास का प्रस्ताव रखा है।




