उत्तर प्रदेश

मजदूरी संकट: लखनऊ में 3.17 करोड़ बकाया, जनवरी से श्रमिकों को नहीं मिला एक पैसा

प्रदेश में वित्तीय वर्ष के अंत में मनरेगा के मानव दिवस लक्ष्य पूर्ति के करीब है, लेकिन काम करने वाले यानी रोज कमाने-खाने श्रमिकों को 1 जनवरी से उनकी मजदूरी नहीं मिली है। लखनऊ में 3.17 करोड़ रुपये मजदूरी बकाया है। बराबर काम करने से बकायेदारी बढ़ रही है। समय से भुगतान न होने पर सक्रिय श्रमिकों की संख्या भी घट रही है। इसके अलावा वर्ष 2024-25 में खरीदी गई निर्माण सामग्री का भी करोड़ों रुपये बकाया है।

जिले में सक्रिय श्रमिक यानी बराबर काम करने वालों की संख्या 61 हजार के आसपास है। मंगलवार को 999 ही काम पर रहे। इनमें बीकेटी में 69, चिनहट में 47, गोसाईगंज में 43, काकोरी में 96, माल में 192, मलिहाबाद में 361, मोहनलागंज में 92 व सरोजनी नगर में 99 ने काम किया। ज्यादातर ने मजदूरी न मिलने की वजह से काम नहीं मांगा। मांग के अनुसार ही मस्टर रोल बनाए गए। जबकि वित्तीय वर्ष समाप्त होने के करीब है और गांव में योजनाओं के अधूरे कार्य तेजी से किए जा रहे हैं। लेकिन, केंद्र से बजट न मिलने के कारण श्रमिकों का भुगतान नहीं हो पा रहा है। फिर भी कार्यों की प्रगति ठीक है। इस वर्ष कुल 6.15 लाख मानव दिवस लक्ष्य में 5.31 लाख सृजित हो चुके हैं।

मार्च अंत तक 100 फीसद पूर्ति का विभाग प्रयास कर रहा है। अब तक कुल 545 परिवारों को 100 दिन बराबर काम मिला है। उपायुक्त रोजगार श्रम सुशील कुमार सिंह ने बताया कि बजट मिलते ही भुगतान किया जाएगा।

विकास भवन में नारेबाजी, मांगा श्रमिकों का भुगतान

मंगलवार को श्रमिकों के भुगतान को लेकर कांग्रेसियों ने प्रदेशव्यापी अभियान चलाया। इस क्रम में विकास भवन में श्रमिकों के साथ पदाधिकारी व कार्यकर्ता एकत्र हुए। बकाया भुगतान को लेकर प्रदर्शन व नारेबाजी की। जल्द भुगतान कराने के लिए उपायुक्त राेजगार श्रम सुशील कुमार सिंह को ज्ञापन दिया।

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