उत्तर प्रदेशबड़ी खबर

Transfer Policy : बलरामपुर, बहराइच, चित्रकूट, फतेहपुर, समेत इन 8 जिलों के डॉक्टरों को मिली बड़ी राहत, देखिए ट्रांसफर नियमावली हुए क्या बदलाव

उत्तर प्रदेश सरकार ने स्वास्थ्य विभाग की तबादला नीति में बड़ा बदलाव करते हुए डॉक्टरों और स्टाफ नर्सों को राहत दी है। नई व्यवस्था के तहत अब चिकित्सीय कार्यों में लगे डॉक्टरों और नर्सिंग अधिकारियों का केवल सेवाकाल पूरा होने के आधार पर अनिवार्य रूप से जिला और मंडल से बाहर तबादला नहीं किया जाएगा। शासन ने मंगलवार को संशोधित नियमावली जारी कर दी।

सरकार ने खास तौर पर आकांक्षी जिलों में स्वास्थ्य सेवाएं मजबूत करने पर फोकस किया है। चित्रकूट, चंदौली, सोनभद्र, फतेहपुर, बलरामपुर, सिद्धार्थनगर, श्रावस्ती और बहराइच समेत आठ जिलों में सभी पदों पर तैनाती सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। इन जिलों में तैनात डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मचारियों को दो वर्ष बाद विकल्प लेकर स्थानांतरित किया जाएगा।

नई ट्रांसफर नीति के अनुसार मुख्य चिकित्साधिकारी और अपर मुख्य चिकित्साधिकारी यदि किसी जिले में तीन वर्ष और किसी मंडल में पांच वर्ष पूरे कर चुके हैं तो उनका तबादला किया जाएगा। वहीं संयुक्त निदेशक, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक और चिकित्सा अधीक्षक पांच वर्ष से अधिक एक ही जिले या मंडल में तैनात नहीं रह सकेंगे।

सबसे अहम बदलाव यह किया गया है कि अस्पतालों में सीधे चिकित्सीय सेवाएं देने वाले डॉक्टरों और स्टाफ नर्सों को केवल सेवाकाल के आधार पर अनिवार्य रूप से बाहर भेजने की बाध्यता खत्म कर दी गई है। सरकार का मानना है कि इससे अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं की निरंतरता बनी रहेगी और डॉक्टरों की कमी वाले जिलों में व्यवस्था मजबूत होगी।

नई व्यवस्था में यह भी कहा गया है कि मुख्य चिकित्साधिकारी के अधीन तैनात अधीक्षक और एमओआईसी को तीन वर्ष पूरा होने पर उसी जिले में दूसरी जगह तैनात किया जा सकेगा। वहीं गंभीर बीमारी की स्थिति में ही नर्सिंग और लिपिकीय कर्मचारियों को पुराने तैनाती स्थल पर दोबारा पोस्टिंग दी जाएगी। शासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि प्रशासनिक आवश्यकता होने पर किसी भी समय तबादले किए जा सकेंगे, लेकिन इसके लिए सक्षम स्तर से मंजूरी लेना अनिवार्य होगा।

Related Articles

Back to top button