
हादसों में कमी लाने के लिए सड़क सुरक्षा को लेकर दनादन होते जागरूकता कार्यक्रम और लंबे समय से चल रहे 4ई- कंसेप्ट के बाद भी हासिल हिसाब शून्य नजर आ रहा है। दुर्घटनाओं और उनसे होने वाली मौतों की रफ्तार थमने का नाम नहीं ले रही है। साल 2024 की तुलना में नवंबर माह 2025 तक का जो तुलनात्मक आंकड़ा आया है वह निराश करने वाला है।
वर्ष 2024 में नवंबर माह तक यानी की 11 महीने के अंतराल में पूरे सूबे में 41,483 हादसे हुए थे। इनमें 21,710 लोगों की मौत हुई थी। इसकी अपेक्षा बीते साल 2025 में इसी अवधि में 46,223 हादसे हुए और इसमें असमय जान गंवाने वालों की संख्या 24,776 थी। यानी मृतको की संख्या में 2024 की अपेक्षा वर्ष 2025 के 11 महीनों में मृतकों की संख्या में 3,066 लोगों का इजाफा हुआ जो काफी अधिक है।
तुलनात्मक आंकड़ा (जनवरी से नवंबर)
| 2024 | 2025 | अंतर | बढ़ोत्तरी प्रतिशत में | |
| सड़क हादसे | 41, 483 | 46,223 | 4,710 | 11.4 |
| मृतकों की संख्या | 21,710 | 24,776 | 3,066 | 14.1 |
| घायलों की संख्या | 31,273 | 35,159 | 3,886 | 12.4 |
केवल नवंबर माह का तुलनात्मक आंकड़ा
| 2024 | 2025 | अंतर | बढ़ोत्तरी प्रतिशत में | |
| सड़क हादसे | 4,543 | 4,625 | 82 | 1.8 |
| मृतकों की संख्या | 2,459 | 2,531 | 72 | 2.9 |
| घायलों की संख्या | 3,504 | 3,420 | -84 | -2.4 |
सड़क सुरक्षा इकाई (रोड सेफ्टी विंग) की स्थापना वर्ष 2015 में हुई थी। इनमें यातायात, पुलिस, स्वास्थ्य, शिक्षा, लोनिवि, एनएचआई समेत विभिन्न महकमे शामिल किए गए थे। इन सभी विभागों के दायित्व तय किए गए। संयुक्त प्रयास करने के निर्देश दिए गए। इन सभी के सामूहिक प्रयास 12 साल बाद भी असर नहीं डाल पाए।
जान लें क्या है ”4-ई कांसेप्ट”
”4-ई कांसेप्ट” का आशय रोड इंजीनियरिंग, एजूकेशन, इमरजेंसी केयर, इन्फोर्समेंट को एक साथ संयुक्त रूप से जमीन पर उतारा जाए जिससे हादसों के दौरान होने वाली मौतों को कम किया जाए।




