
विधानसभा में बजट चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के अगले पांच वर्षों का व्यापक विकास रोडमैप पेश करते हुए कहा कि प्रदेश को सुनियोजित शहरीकरण, औद्योगिक विस्तार और सामाजिक सुरक्षा के साथ नई ऊंचाइयों पर ले जाने का लक्ष्य तय किया गया है। मुख्यमंत्री ने बताया कि अगले पांच वर्षों में 100 नई टाउनशिप विकसित की जाएंगी, जिनमें से 114 प्रस्तावों को पहले ही स्वीकृति दी जा चुकी है।
योगी ने कहा कि शहरी विकास में पारदर्शिता लाने के लिए कंप्लायंस रिडक्शन और डी-रेगुलेशन नीति लागू की गई है। 100 वर्ग मीटर तक आवासीय और 30 वर्ग मीटर तक व्यावसायिक भूखंडों पर नक्शा पास कराने की बाध्यता समाप्त कर दी गई है, जबकि बड़े भूखंडों के लिए ऑनलाइन स्वतः अनुमोदन की व्यवस्था की गई है। इससे आम नागरिकों और छोटे व्यापारियों को बड़ी राहत मिलेगी।
औद्योगिक विकास को गति देने के लिए 27 एक्सप्रेसवे के किनारे इंटीग्रेटेड औद्योगिक क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैं। इसके लिए 12,500 एकड़ का नया लैंड बैंक तैयार हो रहा है, जबकि प्रदेश में कुल 75 हजार एकड़ भूमि बैंक पहले से उपलब्ध है। मुख्यमंत्री ने बताया कि निवेश मित्र पोर्टल के माध्यम से 65 विभागों के 4,675 अनुपालन सरल किए गए हैं और प्रदेश को अब तक 50 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हो चुके हैं।
परिवहन अवसंरचना पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने लखनऊ मेट्रो विस्तार, मेरठ-दिल्ली नमो भारत रैपिड रेल और मेट्रो परियोजनाओं का उल्लेख किया। युवाओं के सशक्तीकरण के लिए स्वामी विवेकानंद युवा सशक्तीकरण योजना के तहत 2,375 करोड़ रुपये से टैबलेट वितरण की घोषणा की गई।
ग्रामीण रोजगार पर मुख्यमंत्री ने कहा कि अब 100 दिन की जगह 125 दिन रोजगार की गारंटी दी जा रही है और काम न मिलने पर बेरोजगारी भत्ता अनिवार्य होगा। उन्होंने कहा कि “गड्ढा खोदो–पाटो” की जगह अब पक्का निर्माण, अमृत सरोवर, बाजार और मंडी जैसे स्थायी कार्य कराए जा रहे हैं। योगी ने कहा कि गरीबी रेखा से ऊपर उठने वालों की सुविधाएं बंद नहीं होंगी, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनाने पर जोर है। ‘इंस्पेक्टर राज’ की जगह ‘फैसिलिटेटर’ कार्य संस्कृति लागू होने से प्रदेश में कारखानों की संख्या 14 हजार से बढ़कर 31 हजार से अधिक हो चुकी है। उन्होंने कहा कि यह बजट विकसित भारत के लक्ष्य के अनुरूप विकसित उत्तर प्रदेश की मजबूत नींव रखेगा।




