
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने उन्नाव गैंगरेप पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत के मामले में कुलदीप सिंह सेंगर की जमानत याचिका सोमवार को खारिज कर दी। केन्द्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने सोमवार को बताया कि कुलदीप सिंह सेंगर एवं अन्य को निचली अदालत ने इस मामले में चार मार्च 2020 को दोषी ठहराया था।
अदालत ने सेंगर को 10 वर्ष का कठोर कारावास, जुर्माना और मृतक के कानूनी उत्तराधिकारियों को 10 लाख रुपये का मुआवजा देने की सजा सुनाई थी। कुलदीप सिंह सेंगर ने निचली अदालत के आदेश के विरुद्ध अपील दायर की थी। याचिका में कहा गया था कि जब तक इस आदेश के खिलाफ उसकी अपील लंबित है तब तक सजा को निलंबित किया जाना चाहिए।
सीबीआई ने अपीलकर्ता की जमानत याचिका का कड़ा विरोध किया। उच्च न्यायालय ने कुलदीप सिंह सेंगर द्वारा दायर सजा निलंबन की याचिका को खारिज कर दिया है। उल्लेखनीय है कि नाबालिग लड़की से बलात्कार से संबंधित मामले में उच्चतम न्यायालय ने अभियुक्त को जमानत देने संबंधी उच्च न्यायालय के आदेश को निरस्त कर दिया था।
बता दें कि उन्नाव रेप केस में दोषी ठहराए गए पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को दिल्ली हाईकोर्ट से 23 दिसंबर को जमानत दी गई थी। हाईकोर्ट के इस आदेश को सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। इससे पहले, सीबीआई की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सेंगर की जमानत पर रोक लगा दी थी।
आपको बताते चलें, उन्नाव दुष्कर्म मामले ने देशभर में भारी आक्रोश पैदा किया था। दिसंबर 2019 में ट्रायल कोर्ट ने सेंगर को नाबालिग लड़की के अपहरण और दुष्कर्म का दोषी ठहराते हुए उसके कारावास की सजा सुनाई थी, साथ ही 25 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया था।




