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BJP : इलेक्टोरल बांड के सामने आने से क्या जीत पायेगी मोदी सरकार ?

भाजपा नेतृत्व में जिस तरह से आनन फानन में बसपा के नेताओं को पार्टी में शामिल कराया है, उससे साफ लगता है कि इन क्षेत्रों में भाजपा को प्रत्याशी उतारने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

ज्ञात होगा कि सोमवार को दिल्ली में बसपा सांसद संगीता आजाद, पार्टी के नेता आज़ाद अरी मर्दन और सर्वोच्च न्यायालय की वकील सीमा समृद्धि ने भाजपा की सदस्यता ग्रहण की, इन नेताओं के पार्टी में शामिल होने से इन क्षेत्रों में भाजपा की स्थिति मजबूत मानी जा रही है। इससे पूर्व भी कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के कई नेता भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर चुके हैं जिन्हें भाजपा आगामी लोकसभा चुनाव में टिकट देने का मन भी बना चुके है। भाजपा जिस तरह से अन्य दलों के नेताओं को पार्टी में शामिल कर रही है उससे जाहिर है, कि भाजपा आगामी लोकसभा चुनाव में अपनी जीत के प्रति उतनी अस्वस्थ नहीं है, जितनी वह बड़े-बड़े दावे कर रही है।

ज्ञात होगा की भाजपा ने पूरे देश को कांग्रेस मुक्त करने का वादा किया था। लेकिन जिस तरह से भाजपा कांग्रेस नेताओं को पार्टी में शामिल कर रही है उससे लग रहा है कि अब भाजपा ही कांग्रेस युक्त भाजपा हो रही है। उत्तर प्रदेश में ही नहीं बल्कि पूरे देश में भाजपा जिस तरह से कांग्रेस नेताओं को पार्टी में शामिल कर रही है उससे लग रहा है, की भाजपा कांग्रेस से न सिर्फ डर रही है बल्कि उसे अपनी जीत पर भी खतरा मड़राता नजर आ रहा है। कांग्रेस की न्याय यात्रा में राहुल गांधी को देश की जनता का जिस तरह से समर्थन मिला है उससे भी भाजपा में बौखलाहट है।

ज्ञात होगा इलेक्टोरल बांड के माध्यम से भाजपा ने करीब 7000 करोड़ का चंदा लिया है,और अब सर्वोच्च न्यायालय के दबाव में स्टेट बैंक को इलेक्टोरल बांड का भी खुलासा करना पड़ेगा, जिसका असर चुनाव पर पड़ेगा। इस फैसले से भी भाजपा की नींद उड़ी हुई है। इसीलिए ऐसी खबरों को मीडिया में जगह ना मिले, इसके लिए भाजपा नए-नए हथकंडे अपना रही है। भाजपा ने पिछले दो लोकसभा चुनाव में जिस तरह से सोशल मीडिया का सहारा लिया था, आज वही सोशल मीडिया भाजपा के कारनामे उजागर करने में जुट गया है। भाजपा के लिए यह भी एक बड़ी चिंता का विषय बन गया है।

राहुल गांधी की न्याय यात्रा की भारी सफलता एवं इलेक्टोरल बांड का खुलासा, भाजपा के लिए नई समस्या पैदा कर सकती है। हालांकि भाजपा इस समस्या को सुलझाने के लिए नए हथकंडे तैयार कर रही है। देखना यह है आगामी चुनाव पर इन हाथ कांडों का क्या असर होगा, लेकिन वर्तमान समय में भाजपा का 400 के पार का नारा बड़ा ही कठिन दिखाई दे रहा है।

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