
लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा में मंगलवार को सवाल-जवाब के दौरान सियासी तकरार के साथ शायरी का रंग भी देखने को मिला। समाजवादी पार्टी (सपा) की विधायक रागिनी सोनकर ने शायरी पढ़ते हुए सरकार पर हमला बोला तो मंत्री गुलाबो देवी ने उसका जवाब दिया। रागिनी सोनकर ने एडेड स्कूलों में विज्ञान विषय के शिक्षकों की कमी का मुद्दा उठाया।
उन्होंने सवाल किया कि सरकार विज्ञान के शिक्षक क्यों उपलब्ध नहीं करा पा रही है और जो प्रधानाचार्य सेवानिवृत्त हो चुके हैं, उनकी भर्तियां कब तक की जाएंगी। इस पर जवाब देते हुए मंत्री गुलाबो देबी ने भी शायरी के अंदाज में पलटवार किया। उन्होंने कहा, “जानकर अंजान बने, ये कुछ और बात है, इनको मालूम न हो ये और बात है। सूर्य की किरणें कितनी भी चमचमाएं, लेकिन सागर को सुखा नहीं सकतीं।”
मंत्री ने संकेत दिया कि सरकार शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए प्रतिबद्ध है। इसी दौरान सपा विधायक सचिन यादव बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर और महात्मा बुद्ध की शोभायात्राओं पर रोक लगाए जाने का मुद्दा उठाया। उन्होंने धर्म की स्वतंत्रता का सवाल खड़ा करते हुए कहा कि शोभायात्राओं के लिए पुलिस रजिस्टर में प्रविष्टि कराकर अनुमति दिए जाने की स्पष्ट व्यवस्था होनी चाहिए।
जवाब में संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने कहा कि योगी 2.0 कार्यकाल में धरना-प्रदर्शन और जुलूस आदि के लिए शासनादेश जारी किया गया है। धार्मिक और सामाजिक कार्यक्रमों के आयोजन के लिए स्पष्ट नियम बनाए गए हैं और उन्हीं के तहत अनुमति दी जाती है। सदन में विधायक पल्लवी पटेल ने उच्च शिक्षा से जुड़ा सवाल उठाया।
उन्होंने विश्वविद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों को मेडिकल लीव दिए जाने की व्यवस्था पर जानकारी मांगी। इस पर उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालयों के शिक्षकों को मिलने वाली सुविधाओं का विवरण साझा किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि विश्वविद्यालय और महाविद्यालय अलग-अलग प्रशासनिक इकाइयां हैं, इसलिए दोनों के शिक्षकों को मिलने वाली सुविधाएं समान हों, यह आवश्यक नहीं है।




