
बीजिंगः चीन के साथ बदलते रिश्तों के बीच प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी करीब 7 साल बाद शनिवार को त्येनजिन शहर पहुंचे, जहां वह 31 अगस्त से 1 सितंबर तक चलने वाले संघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन में शामिल होंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चीन यात्रा से बीजिंग भी खासा उत्साहित दिखा। चीन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शानदार स्वागत में रेड कारपेट बिछा दिया। अमेरिका और भारत के बीच टैरिफ को लेकर चल रहे तनाव के बीच चीन का यह कदम अमेरिका को जलाने के लिए काफी है। रविवार को पीएम मोदी और शी जिनपिंग की द्विपक्षीय बैठक अमेरिका के लिए रणनीतिक और कूटनीतिक रूप से एक बड़ा झटका मानी जा रही है।
पीएम मोदी और जिनपिंग की बैठक फिक्स
पीएम मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच रविवार को एससीओ से इतर द्विपक्षीय बैठक तय हो गई है। दोनों नेता चीन में 7 साल बाद आमने-सामने की बैठक करेंगे। जून 2020 में गलवान घाटी में चीनी सैनिकों के साथ हिंसक झड़प होने के बाद भारत और चीन के रिश्तों में तल्खी आ गई थी, लेकिन पिछले साल कजाकिस्तान में पीएम मोदी और शी जिनपिंग के बीच हुए एक मुलाकात के बाद से ही दोनों देशों के रिश्ते सुधरने लगे थे। अब पहले चीन और उसके बाद भारत पर अमेरिका की ओर से लगाए गए भारी टैरिफ ने नई दिल्ली और बीजिंग को और भी अधिक करीब ला दिया है।
किन मुद्दों पर होगी बात?
रविवार को चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ पीएम मोदी की बैठक को काफी अहम माना जा रहा है। वजह साफ है भारत और चीन ट्रंप की टैरिफ नीति से वैश्विक व्यापार में उपजे तनाव के बीच अपने द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के मद्देनजर यह बैठक करने जा रहे हैं। बैठक में मोदी और जिनपिंग के बीच भारत-चीन आर्थिक संबंधों का जायजा लेने व पूर्वी लद्दाख में सीमा विवाद के बाद रिश्तों में बढ़ी तल्खी को दूर करने के उपायों पर विचार-विमर्श होने की संभावना है। मोदी अपनी दो देशों की यात्रा के दूसरे और अंतिम चरण के तहत जापान से चीन के त्येनजिन पहुंचे।
पुतिन से भी होगी पीएम मोदी की मुलाकात
एससीओ शिखर सम्मेलन के दौरान पीएम मोदी 1 सितंबर यानि सोमवार को रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से भी मुलाकात करेंगे। इसके अलावा वह कई अन्य नेताओं के साथ भी द्विपक्षीय वार्ता कर सकते हैं। त्येनजिन की यात्रा से पहले मोदी ने कहा था कि वैश्विक आर्थिक व्यवस्था में स्थिरता लाने के लिए भारत और चीन का मिलकर काम करना महत्वपूर्ण है। जापानी अखबार ‘द योमिउरी शिंबुन’ को शुक्रवार को दिए साक्षात्कार में प्रधानमंत्री ने कहा था कि भारत और चीन के बीच स्थिर, पूर्वानुमानित और मैत्रीपूर्ण संबंध क्षेत्रीय और वैश्विक शांति एवं समृद्धि पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं। उन्होंने कहा था, “विश्व अर्थव्यवस्था में मौजूदा अस्थिरता को देखते हुए, भारत और चीन जैसी दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं का मिलकर काम करना आवश्यक है, ताकि वैश्विक आर्थिक व्यवस्था में स्थिरता लाई जा सके।” (इनपुट-भाषा)
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