
नई दिल्ली: आयातित खाद्य तेलों की सस्ती बिकवाली ने देश के तेल-तिलहन बाजार पर दबाव बढ़ा दिया है। बीते सप्ताह आयातकों द्वारा लागत से नीचे दाम पर बिक्री किए जाने के कारण सोयाबीन तेल-तिलहन, कच्चा पामतेल (CPO) और पामोलीन तेल की कीमतों में गिरावट जारी रही। आयातित तेलों में कमजोरी का असर घरेलू बाजार की धारणा पर भी पड़ा और सरसों तेल के दाम में मामूली गिरावट दर्ज की गई।
दूसरी ओर, आयातित तेल सस्ता होने से मूंगफली तेल-तिलहन की मांग कमजोर रही और इसके भाव स्थिर बने रहे। सरसों तिलहन की कीमतों में भी कोई खास बदलाव नहीं हुआ। कम दाम पर किसानों की बिकवाली घटने और ऊंचे भाव पर सरसों तेल की खपत प्रभावित होने से बाजार में दबाव बना रहा।
आयातित तेल देशी तेलों से ₹22-28 प्रति किलो सस्ता
बाजार सूत्रों के अनुसार, आयातित खाद्य तेल देशी खाद्य तेलों की तुलना में करीब ₹22 से ₹28 प्रति किलो सस्ते हैं। कीमतों के इस बड़े अंतर से घरेलू तेलों की मांग प्रभावित हो रही है।
सूत्रों ने कहा कि आयातक लागत से नीचे तेल बेचने को मजबूर हैं। उनके मुताबिक, कई आयातकों पर सरकारी बैंकों का कर्ज है और बैंकिंग व्यवस्था में ऋण साख-पत्र (एलसी) को जारी रखने के लिए कारोबार में मुनाफा दिखाना जरूरी होता है। ऐसे में लागत से नीचे बिक्री का असर आगे चलकर किसानों और सरकारी बैंकों पर पड़ने की आशंका जताई गई है।
सोयाबीन और पाम तेल में सबसे ज्यादा दबाव
लागत से नीचे बिकवाली के कारण बीते सप्ताह सोयाबीन तेल-तिलहन, सीपीओ और पामोलीन तेल के भाव कमजोर हुए। आयातित तेलों की गिरावट से कारोबारी धारणा प्रभावित होने के कारण सरसों तेल में भी मामूली नुकसान हुआ।
सरसों के मामले में बाजार की स्थिति अलग तरह की है। जब तेल मिलें सरसों के भाव कम करती हैं तो किसान अपनी उपज की बिक्री घटा देते हैं। वहीं, ऊंचे भाव पर सरसों तेल की खपत मुश्किल होने लगती है। इस कारण बाजार में कीमतों को लेकर संतुलन बनाना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
मूंगफली के भाव स्थिर, सस्ता आयात बना दबाव
आयातित तेलों की कम कीमत के कारण मूंगफली तेल-तिलहन की मांग प्रभावित हुई। इसके बावजूद बीते सप्ताह मूंगफली तेल और तिलहन के दाम स्थिर रहे।
बाजार सूत्रों के मुताबिक, मूंगफली को अच्छा भाव मिलने के कारण इसका उत्पादन बढ़ा है। किसानों और सरकार के पास इसका स्टॉक भी मौजूद है। बेहतर कीमतों के कारण उन राज्यों में भी मूंगफली की बुवाई का रकबा बढ़ा है, जहां पहले इसकी खेती का ज्यादा चलन नहीं था।
बिनौला तेल में आई तेजी
समीक्षाधीन सप्ताह में बिनौला तेल ऐसा प्रमुख तेल रहा, जिसमें तेजी दर्ज की गई। ब्रांडेड कंपनियों की मांग बढ़ने और उपलब्धता कम रहने के कारण बिनौला तेल का भाव ₹200 बढ़कर ₹17,100 प्रति क्विंटल पर बंद हुआ।
15 अगस्त के अवसर पर शनिवार को तेल-तिलहन बाजार बंद रहा। सप्ताहांत में आयात शुल्क मूल्य में भी मामूली बदलाव किया गया।
प्रमुख तेल-तिलहन के भाव
- सरसों दाना: 8,300-8,350 प्रति क्विंटल — स्थिर
- सरसों तेल दादरी: 25 गिरकर 16,750 प्रति क्विंटल
- सरसों पक्की घानी: 5 गिरकर 2,725-2,825 प्रति 15 किलो टिन
- सरसों कच्ची घानी: 5 गिरकर 2,725-2,875 प्रति 15 किलो टिन
- सोयाबीन दाना: 400 गिरकर 6,900-6,950 प्रति क्विंटल
- सोयाबीन लूज: 400 गिरकर 6,750-6,850 प्रति क्विंटल
- सोयाबीन तेल दिल्ली: 50 गिरकर 15,675 प्रति क्विंटल
- सोयाबीन इंदौर तेल: 50 गिरकर ₹15,525 प्रति क्विंटल
- सोयाबीन डीगम तेल: 100 गिरकर 12,000 प्रति क्विंटल
- मूंगफली तिलहन: 7,350-7,925 प्रति क्विंटल — स्थिर
- मूंगफली तेल गुजरात: 17,000 प्रति क्विंटल — स्थिर
- मूंगफली साल्वेंट रिफाइंड: 2,680-2,980 प्रति 15 किलो टिन — स्थिर
- सीपीओ तेल: 100 गिरकर 13,700 प्रति क्विंटल
- पामोलीन दिल्ली: 75 गिरकर 15,575 प्रति क्विंटल
- पामोलीन एक्स कांडला: 75 गिरकर 14,325 प्रति क्विंटल
- बिनौला तेल: 200 बढ़कर 17,100 प्रति क्विंटल




