
दिल्ली आबकारी नीति पर लोक लेखा समिति (PAC) रिपोर्ट सामने आई है। PAC की ताजा रिपोर्ट में दिल्ली की आबकारी नीति को लेकर बड़े खुलासे किए गए हैं। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि तत्कालीन उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के कार्यकाल में लिए गए कई फैसलों से सरकार को 2000 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है। नीति निर्माण व क्रियान्वयन में गंभीर अनियमितताएं सामने आईं हैं।
संदिग्ध फैसले पर क्या-क्या हुईं चूक
PAC की रिपोर्ट के मुताबिक, कई महत्वपूर्ण निर्णय बिना सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी के लिए गए। विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों से हटकर फैसले लिए गए, जबकि लाइसेंस शुल्क समय पर जमा न करने वाले कारोबारियों के खिलाफ कार्रवाई में ढील बरती गई। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कुछ मामलों में लाइसेंस फीस में छूट या कमी दी गई और एयरपोर्ट जोन में Earnest Money Deposit (EMD) वापस कर दी गई, जिससे राजस्व पर प्रतिकूल असर पड़ा।
राजस्व को भारी नुकसान
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इन फैसलों के चलते दिल्ली सरकार को 2000 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ। साथ ही सीएजी की ऑडिट रिपोर्ट में भी भारी राजस्व हानि की पुष्टि की गई है।
कंपनियों के बीच संबंधों पर सवाल
जांच में Indospirit और KhaoGali Restaurants Pvt. Ltd. के बीच शेयरहोल्डिंग और डायरेक्टर स्तर पर संबंध पाए गए। रिपोर्ट के अनुसार, KhaoGali ने अपने शराब स्टॉक का 45.26% Indospirit से खरीदा, जिससे थोक और खुदरा विक्रेताओं के बीच वर्टिकल इंटीग्रेशन के संकेत मिलते हैं।
टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ियां
2021 की आबकारी नीति के तहत टेंडर प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, 22 शिकायतें प्राप्त हुईं, जिनमें से 9 बोलीदाता अयोग्य पाए गए। इसके बावजूद बिना समुचित जांच के 17 खुदरा जोन आवंटित कर दिए गए। कई फैसले बिना कैबिनेट या उपराज्यपाल की मंजूरी के लिए जाने का भी आरोप है।
नीति निर्माण में खामियां
PAC ने कहा कि नीति में बिना उचित कारण बदलाव किए गए और नियमों व प्रक्रियाओं की अनदेखी की गई। रिपोर्ट के अनुसार, नीति को सही प्रक्रिया के बिना लागू किया गया, जिसके चलते इसे एक साल के भीतर, 31 अगस्त 2022 को वापस लेना पड़ा।
पुरानी नीति (2017–2021) में भी अनियमितताएं
रिपोर्ट में 2017 से 2021 के बीच की पुरानी आबकारी नीति में भी कई खामियों का जिक्र है। इसमें नियमों का उल्लंघन कर लाइसेंस जारी करना, IMFL की कीमतों में पारदर्शिता की कमी, गुणवत्ता नियंत्रण में ढिलाई और निगरानी एजेंसियों जैसे Excise Intelligence Bureau (EIB) और प्रवर्तन शाखा की विफलता शामिल हैं। ESCIMS प्रणाली के प्रभावी क्रियान्वयन में भी कमी पाई गई।
जांच जारी, कार्रवाई पर फैसला सदन के हवाले
यह मामला पहले से ही अदालत में लंबित है और सीबीआई व ईडी द्वारा जांच जारी है। PAC ने अपनी सिफारिशों पर अंतिम निर्णय का अधिकार सदन पर छोड़ दिया है। रिपोर्ट सीएजी की ऑडिट, विभागीय जवाबों और समिति के निष्कर्षों पर आधारित है, जिसमें 2017-18 से 2020-21 के बीच दिल्ली में शराब के विनियमन, लाइसेंसिंग, मूल्य निर्धारण और गुणवत्ता मानकों की विस्तृत समीक्षा की गई है।




