
विशेष जरूरत वाले बच्चों को सरकारी विद्यालयों में पढ़ाने वाले विशेष शिक्षकों और रिसोर्स शिक्षकों को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि इन शिक्षकों को संबंधित नियमित शिक्षकों के समान वेतनमान और अन्य परिणामी सेवा लाभ दिए जाएं। अदालत ने आदेश के अनुपालन के लिए प्रमाणित प्रति प्रस्तुत किए जाने की तारीख से चार महीने का समय दिया है।
24 याचिकाकर्ताओं की याचिका पर हाईकोर्ट का फैसला
न्यायमूर्ति इरशाद अली की पीठ ने विपिन मिश्रा समेत 24 याचिकाकर्ताओं की ओर से दाखिल याचिका स्वीकार करते हुए यह आदेश दिया। याचिकाकर्ताओं की नियुक्ति जिला स्तरीय चयन समितियों के माध्यम से इटिनरेंट टीचर और रिसोर्स टीचर के रूप में सर्व शिक्षा अभियान और शासनादेशों के तहत हुई थी।
शुरुआत में इन शिक्षकों की नियुक्ति संविदात्मक बताते हुए उन्हें 6,000 रुपये प्रतिमाह मानदेय दिया जाता था। शिक्षकों का कहना था कि वे नियमित विशेष शिक्षकों के समान ही जिम्मेदारियां निभा रहे हैं, इसलिए उन्हें भी समान वेतन और सेवा लाभ मिलना चाहिए।
विशेष जरूरत वाले बच्चों की शिक्षा के साथ करते थे काउंसलिंग
याचिकाकर्ताओं ने सरकारी विद्यालयों में विशेष जरूरत वाले बच्चों को शिक्षा देने के अलावा उनके आकलन, पुनर्वास, काउंसलिंग और लगातार निगरानी का कार्य भी किया। इन शिक्षकों के पास भारतीय पुनर्वास परिषद (RCI) द्वारा निर्धारित आवश्यक योग्यताएं थीं। संविदा की अवधि लगातार बढ़ाए जाने के कारण कई याचिकाकर्ताओं ने वर्षों तक अपनी सेवाएं दीं। इसके बावजूद उन्हें नियमित शिक्षकों के मुकाबले निश्चित मानदेय ही दिया जा रहा था।
समान काम के लिए समान वेतन का उठाया मुद्दा
याचिकाकर्ताओं ने अदालत में तर्क दिया कि जब वे नियमित विशेष शिक्षकों के समान प्रकृति का कार्य कर रहे हैं तो उन्हें अलग वेतन देना संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन है। उन्होंने समान वेतनमान और सेवा लाभ दिए जाने की मांग की। पीठ ने पाया कि विशेष शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण कार्य करने वाले याचिकाकर्ताओं को केवल निश्चित मानदेय दिया जा रहा था, जबकि समान कार्य करने वाले नियमित शिक्षकों को नियमित वेतनमान और अन्य सेवा लाभ प्राप्त हो रहे थे।
IEDC योजना के प्रावधान का भी दिया हवाला
अदालत ने इंटीग्रेटेड एजुकेशन फॉर डिसेबल्ड चिल्ड्रेन (IEDC) योजना की धारा 12.3 का भी उल्लेख किया। इसमें विशेष शिक्षकों को संबंधित राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में उसी श्रेणी के शिक्षकों के समान वेतनमान दिए जाने का प्रावधान है। हाईकोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार योजना के लाभकारी प्रावधानों को लागू करने के साथ शिक्षकों की सेवा शर्तों से जुड़े प्रावधानों की अनदेखी नहीं कर सकती।
संविदात्मक नियुक्ति बताकर अधिकारों से नहीं किया जा सकता वंचित
पीठ ने स्पष्ट किया कि केवल नियुक्ति को संविदात्मक बताए जाने के आधार पर योग्य शिक्षकों को उनके वैधानिक और संवैधानिक अधिकारों से वंचित नहीं किया जा सकता। राज्य सरकार की उस दलील को भी अदालत ने खारिज कर दिया, जिसमें कुछ याचिकाकर्ताओं द्वारा बाद में नई नियुक्तियां स्वीकार करने का उल्लेख किया गया था। कोर्ट ने कहा कि बाद की नियुक्ति से पूर्व की सेवा अवधि में अर्जित अधिकार समाप्त नहीं हो जाते।
वेतनवृद्धि और अन्य सेवा लाभ भी मिलेंगे
हाईकोर्ट ने विशेष शिक्षकों को समान वेतनमान देने के साथ वार्षिक वेतनवृद्धि, अनुमन्य अवकाश, जहां लागू हो वहां मातृत्व लाभ और सेवा की निरंतरता समेत सभी परिणामी सेवा लाभ देने का निर्देश दिया है। राज्य सरकार को कोर्ट के आदेश का अनुपालन चार महीने के भीतर करना होगा।




