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68500 शिक्षक भर्ती आरक्षण : अभ्यर्थियों ने बीजेपी कार्यालय पर बजाई सीटी, मुख्यमंत्री से वार्ता की मांग

68,500 शिक्षक भर्ती में आरक्षण संबंधी विसंगतियों के समाधान और न्याय की मांग को लेकर आंदोलनरत अभ्यर्थियों ने गुरुवार को बड़ी संख्या में एकत्रित होकर बीजेपी प्रदेश मुख्यालय पर सीटी बजाकर प्रदर्शन किया। अभ्यर्थियों ने कहा कि सीटी बजाने का उद्देश्य शासन और समाज के उन नेताओं एवं मंत्रियों का ध्यान इस मामले की ओर आकर्षित करना है, जिनसे वे तत्काल हस्तक्षेप की अपेक्षा कर रहे हैं।

प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों ने मुख्यमंत्री से तत्काल वार्ता कराने और 68,500 शिक्षक भर्ती के आरक्षण संबंधी मामले का समाधान करने की मांग की। अभ्यर्थियों का कहना है कि वे लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर संघर्षरत हैं, लेकिन अभी तक उन्हें ठोस समाधान नहीं मिल पाया है। अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया कि बीजेपी कार्यालय पर प्रदर्शन के दौरान पुलिस प्रशासन ने उनके साथ बलपूर्वक कार्रवाई की तथा कई अभ्यर्थियों को खींचकर बसों में बैठाकर ईको गार्डन भेज दिया। अभ्यर्थियों ने कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग रखने के बावजूद उनके आंदोलन को इस प्रकार समाप्त करने का प्रयास किया गया।

आंदोलनरत अभ्यर्थियों की प्रमुख मांग है कि राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग द्वारा जारी आदेश का अनुपालन किया जाए, जिसमें उनके अनुसार ओबीसी वर्ग को आरक्षित श्रेणी का लाभ देते हुए 150 में से 60 अंक अर्थात 40 प्रतिशत के आधार पर परिणाम का संशोधन कर पात्र अभ्यर्थियों को नियुक्ति प्रदान की जाए। प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों ने कहा कि वे 1 सितंबर 2026 से लगातार धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। उनका कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता और भर्ती प्रक्रिया को पूरा करने के लिए स्पष्ट कार्यक्रम जारी नहीं किया जाता, तब तक ईको गार्डन में उनका धरना अनवरत जारी रहेगा।

धरने का नेतृत्व कर रहे अभ्यर्थी तूफान सिंह, आशुतोष वर्मा, नवीन चौधरी, अखिल कुमार सहित अन्य अभ्यर्थियों ने कहा कि हमारी लड़ाई किसी व्यक्ति या संगठन के खिलाफ नहीं, बल्कि अपने अधिकार और न्याय की मांग को लेकर है। हम चाहते हैं कि मुख्यमंत्री स्वयं इस मामले का संज्ञान लें, अभ्यर्थियों से वार्ता करें और राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के आदेश के अनुपालन के संबंध में तत्काल निर्णय लेते हुए भर्ती का स्पष्ट शेड्यूल जारी करें। अभ्यर्थियों ने यह भी कहा कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया तो वे लोकतांत्रिक तरीके से अपना आंदोलन जारी रखेंगे और जनप्रतिनिधियों एवं सरकार का ध्यान इस मुद्दे की ओर आकर्षित करने के लिए इसी तरह “सीटी बजाकर जगाने” का अभियान चलाते रहेंगे।

अभ्यर्थियों की मांग है कि शासन इस मामले में तत्काल संज्ञान लेते हुए वार्ता, आदेश के अनुपालन, संशोधित परिणाम तथा नियुक्ति की प्रक्रिया के संबंध में स्पष्ट निर्णय और समयबद्ध कार्यक्रम जारी करे।

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