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Parliament Monsoon Session : राम मंदिर चढ़ावा विवाद और छात्र प्रदर्शन पर संसद में हंगामा, दोनों सदनों की कार्यवाही ठप

अयोध्या राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी और दिल्ली में प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस कार्रवाई के मुद्दों पर विपक्ष के हंगामे के कारण संसद में मंगलवार को भी गतिरोध कायम रहा और दोनों सदनों की कार्यवाही बाधित रही। हालांकि हंगामे के बीच ही दोनों सदनों ने एक-एक विधेयक को मंजूरी दे दी। लोकसभा ने विपक्षी सदस्यों के हंगामे के बीच विनियोग (संख्यांक 3) विधेयक, 2026 को बिना चर्चा के ध्वनिमत से पारित कर दिया।

उधर राज्यसभा ने संक्षिप्त चर्चा के बाद जन्म और मृत्यु का पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 को पारित कर दिया। लोकसभा की पूर्वाह्न 11 बजे बैठक शुरू होते ही विपक्ष के सदस्य हंगामा करने लगे। वे अयोध्या के राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी का मुद्दा उठा रहे थे और दिल्ली में प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर गृह मंत्री अमित शाह के बयान की मांग कर रहे थे।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के सदस्यों से प्रश्नकाल चलने देने का आग्रह करते हुए कहा, ”मैंने कल भी बीएसी (कार्य मंत्रणा समिति) की बैठक में सभी दलों से अनुरोध किया था। संसद लोकतंत्र का सर्वोच्च मंच है और चर्चा एवं संवाद के लिए है। यह नारेबाजी करने और तख्तियां लेकर आने का मंच नहीं है।”

शोर-शराबा जारी रहने पर अध्यक्ष ने सदन की बैठक अपराह्न दो बजे तक स्थगित कर दी। एक बार के स्थगन के बाद बैठक दो बजे शुरू हुई तो पीठासीन सभापति दिलीप सैकिया ने आवश्यक कागजात सदन के पटल पर रखवाये। इस दौरान विपक्षी सदस्य पहले की तरह ही शोर-शराबा कर रहे थे।

हंगामे के बीच ही वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कराधान एवं अन्य विधियां संशोधन विधेयक, 2026 पेश किया। सैकिया ने विपक्षी सदस्यों से अपनी सीट पर जाकर बैठने का आग्रह करते हुए कहा कि यह महत्वपूर्ण विधेयक है और सभी को इसमें सहयोग करना चाहिए। इस बीच, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने विनियोग (संख्यांक 3) विधेयक को चर्चा और पारित करने के लिए पेश किया।

विपक्ष के हंगामे के बीच सदन ने बिना चर्चा के इस विधेयक को ध्वनिमत से पारित कर दिया। पीठासीन सभापति द्वारा बार-बार आग्रह किये जाने के बावजूद भी शोरगुल नहीं थमने पर अपराह्न दो बजकर 17 मिनट पर सदन की कार्यवाही दिन भर के लिए स्थगित कर दी गई। राज्यसभा में भी इन्हीं मुद्दों को लेकर विपक्ष का हंगामा जारी रहा।

हंगामे के कारण उच्च सदन की बैठक दो बार के स्थगन के बाद पूरे दिन के लिए स्थगित कर दी गई। पूर्वाह्न 11 बजे सदन की बैठक शुरू होने पर, कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्षी दलों ने राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए नकदी और कीमती सामान की कथित चोरी का मुद्दा उठाया, जिसका सत्ता पक्ष के सदस्यों ने जोरदार विरोध किया।

सदन में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने राम मंदिर के निर्माण और प्रबंधन के लिए सरकार द्वारा गठित ट्रस्ट के कुछ सदस्यों पर चढ़ावे की कथित चोरी का आरोप लगाते हुए सवाल किया कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) और अन्य जांच एजेंसियां श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट (एसआरजेबीटीके) के सदस्यों पर लगे आरोपों की जांच क्यों नहीं कर रही हैं?

खरगे ने कहा कि इस ट्रस्ट का गठन सरकार ने किया था और इसे 70 एकड़ भूमि आवंटित की गई थी। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने कहा कि विपक्ष जिस मुद्दे को बार-बार उठाने की कोशिश कर रहा है, उसे सदन में उठाने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस और समाजवादी पार्टी इस मुद्दे पर सदन के बाहर भी ”नाटक” कर रही हैं।

खरगे ने चढ़ावे की चोरी के आरोपों की जांच और इस पर सरकार की प्रतिक्रिया की मांग करते हुए कहा कि यह करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़ा मामला है। इस बीच, द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) के सदस्य तिरुचि शिवा ने तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन के पुत्र उदयनिधि स्टालिन को हिरासत में लिए जाने का मुद्दा उठाने का प्रयास किया, लेकिन सभापति सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि यह राज्य का विषय है और इसे संसद में नहीं उठाया जा सकता।

रीजीजू ने आरोप लगाया कि कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने हमेशा ”भगवान राम का अपमान किया” और ”राम मंदिर निर्माण का विरोध किया”। उन्होंने कहा कि अब ये दल ”चंदा चोरी” के मुद्दे पर नाटक कर रहे हैं। उन्होंने विपक्षी दलों को ”भगवान राम का विरोधी” बताते हुए कहा कि राम मंदिर निर्माण के विरोध में काली पट्टी बांधने वाले सांसदों को पहले माफी मांगनी चाहिए।

रीजीजू के इस बयान का विपक्षी सदस्यों ने जोरदार विरोध किया। इसके बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के सदस्य आसन के सामने आ गए और दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक तथा नारेबाजी शुरू हो गई। हंगामे के कारण सभापति ने सदन की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित कर दी। सदन की बैठक दोपहर 12 बजे फिर शुरू होने पर भी सदन में वही नजारा दिखा।

हंगामे के बीच ही सभापति राधाकृष्णन ने प्रश्नकाल शुरू कराया। कुछ सदस्यों ने पूरक प्रश्न भी पूछे और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण तथा शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने उनके जवाब भी दिए। लगातार नारेबाजी और शोर-शराबे के बीच सभापति ने सदन की कार्यवाही दोपहर दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी। दो बार के स्थगन के बाद दोपहर दो बजे बैठक शुरू होने पर भी सदन में हंगामा जारी रहा और गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने शोरगुल के बीच ही जन्म और मृत्यु का पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 को चर्चा एवं पारित करने के लिए पेश किया।

विपक्षी सदस्यों ने कहा कि यह अत्यंत महत्वपूर्ण विधेयक है और गृह मंत्री अमित शाह को सदन में होना चाहिए। विपक्षी सदस्यों ने गृह मंत्री की सदन में अनुपस्थिति को लेकर नारे भी लगाए। हंगामे के बीच ही विधेयक पर संक्षिप्त चर्चा हुई और गृह राज्य मंत्री राय ने चर्चा का जवाब दिया। मंत्री के जवाब के बाद उपसभापति हरिवंश ने अपराह्न दो बज कर 50 मिनट पर बैठक को पूरे दिन के लिए स्थगित कर दिया।

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