
हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने घाघरा नदी के खस्ताहाल ‘घाघराघाट पुल’ से जुड़ी एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI), मिनिस्ट्री ऑफ रोड ट्रांसपोर्ट एंड हाईवे और उत्तर प्रदेश राज्य ब्रिज कॉरपोरेशन को नोटिस जारी किया है।
हाईकोर्ट के एडवोकेट आशीष कुमार सिंह ने पुल की जर्जर हालत और संभावित खतरों को लेकर ये याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट ने संबंधित तीनों विभागों के अधिकारियों को 18 मार्च को पुल की विस्तृत रिपोर्ट के साथ उपस्थित होने का निर्देश दिया है।
8.jpg)
घाघराघाट पुल, बाराबंकी और बहराइच बॉर्डर पर एनएच-28 सी हाईवे पर बना है। ये मार्ग पूर्वी यूपी के गोंडा, बहराइच, बलरामपुर, श्रावस्ती और बाराबंकी को राजधानी लखनऊ से जोड़ता है। इस पुल से रोजाना सैकड़ों वाहनों का आवागमन होता है। चूंकि इस वक्त पुल की हालत काफी खराब है। राजधानी को जोड़ने वाला यही एकमात्र मुख्य मार्ग है तो लोग मजबूरन जान जोखिम में डालकर गुजरते हैं।
इलाहाबाद हाईकोर्ट के अधिवक्ता आशीष कुमार सिंह ने पुल की हालत और संभावित खतरों के दृष्टिगत एक जिम्मेदार नागरिक का परिचय दिया है। उन्होंने इस प्रकरण को सीधे तौर पर जनसुरक्षा एवं संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन एवं सुरक्षा का अधिकार मानते हुए उच्च न्यायालय का रुख किया।
उन्होंने हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ के समक्ष दाखिल जनहित याचिका में पुल की संरचनात्मक कमजोरियों, आमजन की सुरक्षा पर मंडराते जोखिम तथा यातायात एवं आपातकालीन सेवाओं पर पड़ने वाले गंभीर प्रभावों को रेखांकित किया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए चीफ जस्टिस की बेंच ने एनएचएआई, मिनिस्ट्री ऑफ रोड ट्रांसपोर्ट एंड हाईवेज और यूपी ब्रिज कॉरपोरेशन को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने संबंधित तीनों प्राधिकरणों को निर्देशित किया है कि इस मामले में विस्तृत निर्देशों के साथ कोर्ट में उपस्थित हों, ताकि पुल की वर्तमान स्थिति और प्रस्तावित सुरक्षा उपयों पर ठोस विचार किया जा सके।
सनद रहे कि देश के अलग-अलग हिस्सों में जर्जर पुलों के ढहने की बड़ी दुर्घटनाएं सामने आती रही हैं, जिनमें जान-माल का काफी नुकसान होता रहा है। लेकिन घाघराघाट पुल को लेकर यहां जिस तरह से अदालत का रुख किया गया है, वो एक जिम्मेदार नागरिक का परिचय कराता है। कोर्ट के जरिये ही सही कम से कम इस पुल पर मंडराते खतरे से आम लोगों को बचाने की एक बेहतरीन पहल जरूर हुई है।




