
लखनऊ। भारतीय सनातन संस्कृति, वैदिक विद्याओं एवं प्राचीन ज्ञान परंपरा के संरक्षण और उनके वास्तविक साधकों को सशक्त मंच प्रदान करने के उद्देश्य से “अनमोलयोगी” नामक वेबसाइट का आज भव्य शुभारंभ किया गया। यह मंच किसी प्रकार की तुलना या प्रतिस्पर्धा नहीं, बल्कि एक विचारधारा आधारित प्रयास है, जो क्रमिक रूप से उन साधकों को सामने लाने का कार्य करेगा, जिन्होंने किसी विद्या को गहराई से साधा है और जो समाज को वास्तविक समाधान देने में सक्षम हैं।
“अनमोलयोगी” नाम अपने आप में गहन अर्थ समेटे हुए है— अनमोल अर्थात जिसका कोई मोल नहीं और योगी अर्थात जिसने किसी विद्या में योग घटित कर लिया हो। यह मंच ऐसे ही अनमोल रत्नों को पहचान देने का प्रयास है, जो हमारी सांस्कृतिक धरोहर हैं।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए आचार्य राज शर्मा जी ने कहा कि यह मंच केवल एक व्यक्ति की सोच नहीं, बल्कि एक सामूहिक प्रयास का परिणाम है। इस विचार को मूर्त रूप देने में श्री रौनक जी की तकनीकी दृष्टि, निरंतर परिश्रम और टीम समन्वय की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उन्होंने यह भी कहा कि इस पूरे सफर में धर्मपत्नी श्रीमती अनीता शर्मा जी का सहयोग आधारशिला के समान रहा, जिनके बिना यह संभव नहीं हो पाता।
अनमोलयोगी की संकल्पना के पीछे दो प्रमुख घटनाएँ प्रेरणा बनीं। पहली, जब एक व्यक्ति ने सोशल मीडिया पर अपने सपनों में बार-बार सांप आने की समस्या साझा की और विभिन्न दोषों के नाम पर उसे भ्रमित उत्तर मिले। वास्तु के सूक्ष्म ज्ञान के आधार पर दिए गए एक सटीक समाधान से न केवल उसकी समस्या का समाधान हुआ, बल्कि यह भी सिद्ध हुआ कि सही विद्या और सही साधक कितना प्रभावी हो सकता है।
दूसरी प्रेरणा एक मित्र के कथन से मिली, जिसमें उन्होंने कहा कि ऐसे और भी लोग होने चाहिए, जिनकी विद्या “तीर की तरह सटीक” हो। यहीं से वास्तविक साधकों को एक मंच पर लाने की आवश्यकता महसूस हुई।
टीम ने बताया कि वेबसाइट जितनी सरल और समाधान-केंद्रित दिखाई देती है, उतनी ही गहराई में साधकों के लिए अनेक सुविधाएँ और संरचनाएँ समाहित हैं, जिससे आगंतुक तुरंत अपने प्रश्नों का समाधान प्राप्त कर सकें।
अनमोलयोगी टीम ने इसे एक ओपन कॉल बताते हुए कहा कि जो भी व्यक्ति इस अभियान से जुड़कर योगदान देना चाहता है, उसका स्वागत है। आने वाले समय में कोर कमेटी, तकनीकी सहयोग, वैचारिक योगदान और फंडिंग की आवश्यकता होगी। इसके लिए वेबसाइट पर शीघ्र ही “Work With Us” लिंक जोड़ा जाएगा।
इस भव्य अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में श्री सूर्य कांत मिश्रा (IRS) की गरिमामयी उपस्थिति रही। उन्होंने अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में कहा कि ऐसे प्रयास सनातन विद्याओं को नई पीढ़ी तक पहुँचाने में मील का पत्थर साबित होंगे।
कार्यक्रम का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि सामूहिक प्रयासों से देश को पुनः सनातन विद्याओं की ओर अग्रसर किया जाएगा और वर्षों से वैदिक विधाओं में कार्य कर रहे अनमोल साधकों को उनका उचित सम्मान और पहचान दिलाई जाएगी।




