
अयोध्या। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अब लोग नए वर्ष पर परिवार के साथ मंदिरों में दर्शन-पूजन को प्राथमिकता दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज की पीढ़ी उन स्थानों से दूरी बना रही है, जहां सनातन परंपरा के विरोध की गतिविधियां होती हैं।
दरअसल, चैत्र नवरात्रि के प्रथम दिन गुरुवार को द्रौपदी मुर्मु ने श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में ‘श्रीराम यंत्र’ की विधिवत प्रतिष्ठापना की। इस अवसर पर योगी आदित्यनाथ, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, संत-महात्मा और हजारों श्रद्धालु उपस्थित रहे। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेशवासियों को भारतीय नवसंवत्सर की शुभकामनाएं दीं और अयोध्या धाम की आध्यात्मिक महत्ता का उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि सरयू का पावन जल इस नगरी को निरंतर पवित्र करता है और यहां आयोजित धार्मिक अनुष्ठान रामराज्य की अनुभूति कराते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि जहां दुनिया के कई हिस्सों में युद्ध और अशांति का माहौल है, वहीं अयोध्या में इस प्रकार के आयोजन भारत की सांस्कृतिक शक्ति और आध्यात्मिक विरासत को दर्शाते हैं। उन्होंने कहा कि “हम ऐसे समय में श्रीराम यंत्र की प्रतिष्ठापना के साक्षी बन रहे हैं, जब विश्व अशांत है, और यह हमारे लिए रामराज्य की अनुभूति का क्षण है।”
उन्होने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि आस्था को अंधविश्वास बताकर उसका अपमान किया गया, जबकि स्वयं सत्ता में रहने वाले लोग नोएडा जाने जैसे मिथकों का पालन करते रहे। उन्होंने कहा कि सदियों के संघर्ष के बाद श्रीराम जन्मभूमि का भव्य स्वरूप सामने आया है, जो देश की आस्था का प्रतीक है।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि मंदिर आज ‘राष्ट्र मंदिर’ का स्वरूप ले चुका है और यह रामराज्य की आधारशिला है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 में उत्तर प्रदेश के धार्मिक स्थलों-अयोध्या, काशी, प्रयागराज और मथुरा-वृंदावन में कुल 156 करोड़ श्रद्धालु-पर्यटक पहुंचे, जो राज्य की बढ़ती आध्यात्मिक पहचान को दर्शाता है।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने राम मंदिर आंदोलन से जुड़े संतों, रामभक्तों और कारीगरों का अभिनंदन किया तथा दिवंगत अशोक सिंघल सहित सभी योगदानकर्ताओं को नमन किया। इस अवसर पर अमृतानंदमयी समेत कई संत-महात्मा, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पदाधिकारी, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय सहित अनेक गणमान्य लोग मौजूद रहे।




