
वाराणसी। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने धार्मिक नगरी काशी के मणिकर्णिका घाट पर मूर्तियों को खंडित करने वाले कथित वीडियो की ओर इशारा करते हुये कहा कि पिछले 11 वर्षों में काशी के समग्र विकास की योजना को बाधित करने के लिए साजिशें रची जा रही हैं और दुष्प्रचार किया जा रहा है।
काल भैरव मंदिर और विश्वनाथ मंदिर में दर्शन-पूजन करने के बाद योगी ने शनिवार को यहां एक प्रेस कांफ्रेंस में कहा ” काशी के समग्र विकास की योजना को बाधित करने के लिये साजिशें रची जा रही हैं और दुष्प्रचार किया जा रहा है। इसके सही तथ्य जनता के सामने आ सकें, इसलिए मुझे आज काशी आना पड़ा है।”
उन्होंने कहा, “काशी अविनाशी है। काशी के प्रति हर सनातनी और हर भारतवासी अपार श्रद्धा रखता है। स्वतंत्र भारत में काशी को जो सम्मान मिलना चाहिए था और जिस गति से उसका विकास होना चाहिए था, वह समग्र विकास पहले नहीं हो पाया। पिछले 11 वर्षों में काशी अपनी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण करते हुए उसका संवर्धन कर रही है। साथ ही भौतिक विकास के माध्यम से नई ऊँचाइयों को छू रही है। काशी को एक नई वैश्विक पहचान मिली है। काशी का प्रतिनिधित्व देश की संसद में यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी करते हैं।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि काशी की पुरातन काया को संरक्षित रखते हुए उसे नए क़लेवर में देश-दुनिया के सामने प्रस्तुत किया जा रहा है। इसी के अनुरूप 55 हजार करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाएँ काशी के लिए स्वीकृत हुई हैं। इनमें से 36 हजार करोड़ रुपये की परियोजनाएँ लोकार्पित हो चुकी हैं और शेष पर कार्य प्रगति पर है। उन्होंने कहा कि 2014 से पहले काशी विश्वनाथ मंदिर में प्रतिदिन पांच हजार से 25 हजार तक श्रद्धालु आते थे। आज यह संख्या डेढ़ लाख से डेढ़ लाख प्रतिदिन हो गई है। पीक सीजन में यह संख्या 6 लाख से 10 लाख तक पहुँच जाती है।
अकेले काशी ने देश की जीडीपी में 1.3 लाख करोड़ रूपये का योगदान किया है : योगी
मुख्यमंत्री योगी ने शनिवार को कहा कि काशी विश्वनाथ धाम बनने के बाद अब तक अकेले काशी ने देश की जीडीपी में 1.3 लाख करोड़ रुपये का योगदान दिया है। योगी ने यहां पत्रकारों से कहा कि गत वर्ष काशी में 11 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने बाबा विश्वनाथ के दर्शन किए। उन्होंने काशी के समग्र विकास को देखा। यहां रोजगार के नए अवसर सृजित हुए हैं। आज काशी की सड़कें फोर-लेन से जुड़ गई हैं। काशी से ट्रेन सुविधाएं देश के विभिन्न हिस्सों के लिए बढ़ी हैं-वंदे भारत से लेकर अमृत भारत एक्सप्रेस और अन्य तमाम ट्रेनें शामिल हैं। (इनलैंड वाटरवेज) की सुविधा अगर कहीं शुरू हुई तो वाराणसी से हल्दिया के बीच ही प्रारंभ हुई। देश का पहला रोपवे प्रोजेक्ट भी वाराणसी में मूर्त रूप ले रहा है। काशी विश्वनाथ धाम के साथ ही आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत से जुड़े सभी स्थलों का संरक्षण करते हुए उन्हें नए कलेवर में प्रस्तुत करने का कार्य लगातार चल रहा है।
उन्होने कहा कि काशी की पहचान काशी विश्वनाथ मंदिर, अन्य पवित्र मंदिरों और मां गंगा से है। 2014 से पहले गंगा का जल आचमन तो दूर, स्नान करने लायक भी नहीं था। आज गंगा में आचमन भी किया जा सकता है और स्नान भी। काशी की पहचान इसके घाट हैं। हर कोई कह सकता है कि 2014 से पहले काशी के घाटों की क्या दुर्दशा थी। आज वही घाट हर भारतीय को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। पुरातन वैभव के साथ आधुनिक कलेवर में स्वच्छ और सुंदर दिखाई देते हैं। देश का सबसे बड़ा घाट-नमो घाट-काशी में पूरे देश को जोड़ने का माध्यम बन गया है।
योगी ने कहा ” याद कीजिए, 2014 से पहले विश्वनाथ मंदिर में मुश्किल से 50 श्रद्धालु एक साथ दर्शन कर पाते थे। आज 50 हजार श्रद्धालु बड़े आराम से एक साथ आ सकते हैं। हर व्यक्ति आराम से दर्शन और अभिषेक कर सकता है।”




