
भिवंडी मेयर चुनाव का नतीजा आ गया है जिसमें बीजेपी उम्मीदवार की हार हुई है और पार्टी से बगावत कर सेक्युलर फ्रंट बनाने वाले नारायण चौधरी की जीत हुई है। नारायण चौधरी अब भिवंडी के मेयर चुने गए है। नारायण चौधरी को इस चुनाव में कुल 48 वोट मिले हैं। बता दें कि बीजेपी नेता नारायण चौधरी की लीडरशिप में नौ पार्षदों ने भाजपा से बगावत कर दूरी बना ली और ये सभी काउंसलर कांग्रेस के सपोर्ट वाले ‘भिवंडी सेक्युलर फ्रंट’ के करीब चले गए और फिर उनके लीडर नारायण चौधरी मेयर चुन लिए गए। बीजेपी के कुछ पार्षदों के कांग्रेस के सपोर्ट वाले फ्रंट में जाने से भिवंडी में माहौल 2017 के मेयर चुनाव के जैसा हो गया था। भाजपा समर्थकों ने इस घटनाक्रम को ‘स्ट्रेटेजिक पैंतरा’ बताया था।
भाजपा ने बदल दिया कैंडिडेट
बीजेपी ने बगावत करने वाले पार्षदों पर कार्रवाई करने की बात कही है। ऐसा कहा जा रहा है कि बीजेपी में दरार तब शुरू हुई जब उसने अपना मेयर कैंडिडेट बदल दिया और नारायण चौधरी का पत्ता कट गया। पार्टी ने शुरू में नारायण चौधरी को पार्टी का कैंडिडेट बताया गया था, लेकिन बाद में उनकी जगह स्नेहा पाटिल को उम्मीदवार बनाया था। इसके बाद नारायण चौधरी गुट ने दावा किया कि इस कदम से काउंसलर्स में नाराजगी पैदा हुई है।
नारायण चौधरी ने क्यों की थी भाजपा से बगावत
नारायण चौधरी ने टाइम्स ऑफ इंडिया से बात करते हुए पहले ही बताया था कि बीजेपी ने पहले मुझे अपना मेयर कैंडिडेट बनाया था, लेकिन बाद में मुझे बदल दिया। उन्होंने कहा कि आठ काउंसलर के साथ, मैं सेक्युलर फ्रंट को सपोर्ट देने पर विचार कर रहा हूं। उन्होंने कहा कि आखिरी फैसला लीगल कंसल्टेशन के बाद होगा। वहीं एसपी विधायक रईस शेख ने बताया कि मैंने भिवंडी के लोगों से वादा किया था कि सेक्युलर फ्रंट का मेयर चुना जाएगा। उन्होंने कहा कि मौजूदा डेवलपमेंट से पता चलता है कि हम उस गोल के करीब हैं।
कांग्रेस नेता ने कही थी ये बात
महाराष्ट्र कांग्रेस के वाइस-प्रेसिडेंट गणेश पाटिल ने इस कदम की पुष्टि की थी और बताया था कि बीजेपी के नौ पार्षद भिवंडी सेक्युलर फ्रंट का हिस्सा होंगे और हम एनसीपी (शरद पवार) के साथ मिलकर गंभीर चर्चा कर रहे हैं।




