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‘यादव जी की लव स्टोरी’ के मेकर्स अब लेंगे चैन की सांस, SC ने खारिज की याचिका, ‘घूसखोर पंडत’ से बिल्कुल अलग है मामला

मनोज बाजपेयी की ‘घूसखोर पंडित’ के बाद अब एक और फिल्म ‘यादव जी की लव स्टोरी’ अपनी रिलीज से पहले चर्चा में है। हालांकि फिल्म के मेकर्स के लिए राहत की बात यह है कि सुप्रीम कोर्ट ने इसके शीर्षक को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को ‘घूसखोर पंडत’ केस से बिल्कुल अलग करार दिया। इस मामले पर अब सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई नहीं होगी और इसकी वजह भी अदालत ने साफ कर दी है।

सुप्रीम कोर्ट ने याचिका खारिज की

सुप्रीम कोर्ट ने फिल्म ‘यादव जी की लव स्टोरी’ के नाम पर रोक लगाने या उसे बदलने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि फिल्म का टाइटल यादव समुदाय की छवि को किसी भी तरह से धूमिल नहीं करता है। जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुयान की बेंच ने याचिका को आधारहीन बताते हुए कहा कि किसी फिल्म के शीर्षक को महज आशंका के आधार पर असंवैधानिक नहीं ठहराया जा सकता।

कोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणी

मामले की सुनवाई के दौरान बेंच ने कहा कि रिकॉर्ड में मौजूद सामग्री पर विचार करने के बाद यह स्पष्ट होता है कि टाइटल में किसी भी आपत्तिजनक विशेषण का इस्तेमाल नहीं किया गया है। कोर्ट ने कहा, ‘हम यह समझ पाने में असमर्थ हैं कि फिल्म का टाइटल किसी समुदाय को गलत तरीके से कैसे दिखाता है। याचिकाकर्ता द्वारा जताई गई आशंकाएं पूरी तरह बेबुनियाद हैं।’

‘घूसखोर पंडित’ केस से तुलना

कोर्ट ने इस मामले की तुलना पिछले ‘घूसखोर पंडित’ विवाद से की और दोनों के बीच का अंतर स्पष्ट किया। बेंच ने तर्क दिया कि ‘घूसखोर’ शब्द का अर्थ भ्रष्ट होता है, जो किसी समुदाय के साथ जुड़कर एक नकारात्मक अर्थ पैदा करता है। इसके विपरीत, ‘यादव जी की लव स्टोरी’ में ऐसा कोई शब्द नहीं है जो यादव समुदाय के प्रति समाज में नकारात्मक संदेश भेजता हो।

रिलीज की तारीख

तमाम कानूनी अड़चनों के दूर होने के बाद, अब यह फिल्म अपनी तयशुदा तारीख यानी 27 फरवरी 2026 को सिनेमाघरों में दस्तक देने के लिए पूरी तरह तैयार है। फिल्म के मेकर्स और फैंस के लिए कोर्ट का यह फैसला एक बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है।

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