
टोक्यो। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि भारत और जापान मिलकर स्थिरता, वृद्धि और समृद्धि के लिए एशियाई सदी को आकार देंगे। मोदी ने यहां आयोजित भारत-जापान आर्थिक मंच को संबोधित करते हुए कहा कि जापान की उत्कृष्टता एवं भारत की व्यापकता एक आदर्श साझेदारी और पारस्परिक वृद्धि का निर्माण कर सकती है।
प्रधानमंत्री आज सुबह दो दिवसीय यात्रा पर जापान की राजधानी टोक्यो पहुंचे। यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की व्यापार और शुल्क नीतियों को लेकर अमेरिका के साथ भारत के संबंधों में तनाव है। भारत को एक आकर्षक निवेश गंतव्य के रूप में पेश करते हुए मोदी ने कहा कि देश में राजनीतिक एवं आर्थिक स्थिरता के साथ-साथ नीतिगत निर्णयों में पारदर्शिता के साथ भरोसेमंद होना है। उन्होंने कहा कि भारत में पूंजी केवल बढ़ती ही नहीं, बल्कि कई गुना बढ़ती है।
मोदी ने कहा, ‘‘भारत आज दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था है और बहुत जल्द यह तीसरी सबसे बड़ी वैश्विक अर्थव्यवस्था बन जाएगा।’’ पीएम मोदी ने कहा कि भारत ने कृत्रिम मेधा (एआई), सेमीकंडक्टर, क्वांटम कंप्यूटिंग, जैव प्रौद्योगिकी और अंतरिक्ष सहित कई प्रमुख क्षेत्रों में साहसिक एवं महत्वाकांक्षी पहल की हैं। उन्होंने कहा कि जापान की प्रौद्योगिकी और भारत की प्रतिभा मिलकर इस सदी की प्रौद्योगिक क्रांति का नेतृत्व कर सकती है।
मोदी ने कहा कि भारत और जापान… मोटर वाहन क्षेत्र जैसी सफल साझेदारी अब रोबोटिक्स, सेमीकंडक्टर, जहाज विनिर्माण और परमाणु ऊर्जा के क्षेत्रों में भी बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत की विकास यात्रा में जापान सदैव एक महत्वपूर्ण साझेदार रहा है। मेट्रो से लेकर विनिर्माण तक, सेमीकंडक्टर से लेकर स्टार्टअप तक हर क्षेत्र में भारत-जापान साझेदारी आपसी विश्वास का प्रतीक बनी है।
मोदी ने कहा कि भारत ‘ग्लोबल साउथ’ में जापानी कंपनियों को एक आधार प्रदान करता है। भारत और जापान ‘ग्लोबल साउथ’ खासकर अफ्रीका के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। ‘ग्लोबल साउथ’ शब्द का इस्तेमाल आम तौर पर आर्थिक रूप से कम विकसित और विकासशील देशों के लिए किया जाता है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की राजनीतिक और आर्थिक स्थिरता के साथ ही नीतियों में पारदर्शिता ने इसे विशेष रूप से हरित ऊर्जा, विनिर्माण और प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में एक आकर्षक निवेश स्थल बना दिया है। उन्होंने कहा कि जापानी कंपनियों ने भारत में 40 अरब डॉलर से अधिक का निवेश किया है, जिसमें पिछले दो वर्षों में 13 अरब डॉलर का निवेश शामिल है।
मोदी ने पिछले 11 वर्षों में देश में हुए उल्लेखनीय बदलावों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा, ”आज हमारे पास राजनीतिक और आर्थिक स्थिरता है, और स्पष्ट एवं भरोसेमंद नीतियां हैं। भारत अब दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था है, और बहुत जल्द, यह दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा।”
प्रधानमंत्री ने कहा, ”भारत वैश्विक वृद्धि में 18 प्रतिशत का योगदान दे रहा है। देश के पूंजी बाजार अच्छा प्रतिफल दे रहे हैं, और हमारे पास एक मजबूत बैंकिंग क्षेत्र है। मुद्रास्फीति और ब्याज दरें कम हैं, और विदेशी मुद्रा भंडार लगभग 700 अरब अमेरिकी डॉलर है।” मोदी ने विनिर्माण, प्रौद्योगिकी और नवाचार, हरित ऊर्जा, अगली पीढ़ी के बुनियादी ढांचे, कौशल विकास और लोगों के बीच संबंधों को दोनों पक्षों के बीच सहयोग का मुख्य केंद्र बताया।
मोदी ने कहा, ”भारत और जापान की साझेदारी रणनीतिक और स्मार्ट है। आर्थिक तर्क से प्रेरित होकर, हमने साझा हितों को साझा समृद्धि में बदल दिया है।” जापान को एक ‘तकनीकी महाशक्ति’ और भारत को एक ‘प्रतिभा महाशक्ति’ बताते हुए, उन्होंने कहा कि दोनों देश कृत्रिम मेधा, सेमीकंडक्टर, क्वांटम कंप्यूटिंग, जैव प्रौद्योगिकी और अंतरिक्ष समेत इस सदी की प्रौद्योगिकी क्रांति का नेतृत्व कर सकते हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि जापान हमेशा से भारत की विकास यात्रा में एक प्रमुख भागीदार रहा है, चाहे वह मेट्रो नेटवर्क हो, विनिर्माण हो, सेमीकंडक्टर हो या स्टार्टअप। उन्होंने कहा, ”जापान की प्राद्योगिकी और भारत की प्रतिभा मिलकर इस सदी की तकनीकी क्रांति का नेतृत्व कर सकते हैं।” मोदी ने स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में संभावित सहयोग के बारे में भी विस्तार से बताया।
उन्होंने कहा, ”भारत 2030 तक 500 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा की ओर तेजी से बढ़ रहा है। हमारा लक्ष्य 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा का है। सौर सेल से लेकर हरित हाइड्रोजन तक साझेदारी के अपार अवसर हैं।” उन्होंने कहा कि भारत और जापान के बीच एक संयुक्त ऋण व्यवस्था पर समझौता हुआ है और इसका उपयोग स्वच्छ और हरित भविष्य के निर्माण में सहयोग के लिए किया जा सकता है। प्रधानमंत्री ने अगली पीढ़ी के बुनियादी ढांचे पर भी बात की, जिस पर दोनों देश काम कर सकते हैं।
उन्होंने कहा, ”पिछले दशक में, भारत ने अगली पीढ़ी के परिवहन और लॉजिस्टिक बुनियादी ढांचे में अभूतपूर्व प्रगति की है। हमारे बंदरगाहों की क्षमता दोगुनी हो गई है। 160 से ज्यादा हवाई अड्डे हैं। एक हजार किलोमीटर लंबी मेट्रो लाइनें बनाई गई हैं। जापान के सहयोग से मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल पर भी काम चल रहा है।” मोदी ने कहा, ”जापान की उत्कृष्टता और भारत का पैमाना एक आदर्श साझेदारी का निर्माण कर सकते हैं।”
प्रधानमंत्री ने कहा कि कौशल विकास के क्षेत्र में भारत के कुशल श्रमिकों में वैश्विक जरूरतों को पूरा करने की क्षमता है। उन्होंने कहा, ”जापान भी इससे लाभान्वित हो सकता है। आप भारतीय प्रतिभाओं को जापानी भाषा और कौशल में प्रशिक्षित कर सकते हैं, और साथ मिलकर जापान के लिए कार्यबल तैयार कर सकते हैं। एक साझा कार्यबल साझा समृद्धि की ओर ले जाएगा।”
प्रधानमंत्री ने अपनी सरकार के विभिन्न सुधार उपायों का भी उल्लेख किया और कहा कि उनका जोर ‘सुधार, प्रदर्शन और परिवर्तन’ पर रहा है। उन्होंने कहा, ”2017 में हमने ‘एक राष्ट्र-एक कर’ लागू किया था और अब हम इसमें नए और बड़े सुधार करने जा रहे हैं। कुछ सप्ताह पहले, हमारी संसद ने नई और सरलीकृत आयकर संहिता को भी मंजूरी दी है।” मोदी ने कहा कि उनकी सरकार के सुधार सिर्फ कर प्रणाली तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उन्होंने कारोबारी सुगमता पर भी पूरा जोर दिया है।